लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों के नेता एक दूसरे पर जमकर कटाक्ष कर रहे हैं. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर कांग्रेस पर पार्टी पर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी में एक वंशवाद ने देश को कमजोर किया. पीएम ने एक ब्लॉग लिखकर कहा कि जब कोई सरकार ‘Family First’ की बजाए ‘India First’ की भावना के साथ चलती है तो यह उसके काम में भी दिखाई देता है. यह हमारी सरकार की नीतियों और कामकाज का ही असर है कि बीते पांच वर्षों में, भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है. पीएम ने कहा कि वर्ष 2014 का जनादेश ऐतिहासिक था. भारत के इतिहास में पहली बार किसी गैर वंशवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था. तब आम चुनाव में देशवासियों ने भ्रष्टाचार में डूबी उस सरकार से मुक्ति पाने और एक बेहतर भविष्य के लिए मतदान किया था.

उन्होंने कहा कि 2014 में देशवासी इस बात से बेहद दुखी थे कि हम सबका प्यारा भारत आखिर फ्रेजाइल फाइव देशों में क्यों है? क्यों किसी सकारात्मक खबर की जगह सिर्फ भ्रष्टाचार, चहेतों को गलत फायदा पहुंचाने और भाई-भतीजावाद जैसी खबरें ही हेडलाइन बनती थीं.

उन्होंने कहा कि 2014 की गर्मियों के दिन थे, जब देशवासियों ने निर्णायक रूप से मत देकर अपना फैसला सुनाया. देश वासियों ने परिवारतंत्र को नहीं, लोकतंत्र को चुना. विनाश को नहीं, विकास को चुना. शिथिलता को नहीं, सुरक्षा को चुना. अवरोध को नहीं, अवसर को प्राथमिकता दी. वोट बैंक की राजनीति के ऊपर विकास की राजनीति को रखा.

पीएम ने कहा कि आज हर क्षेत्र में हुए बुनियादी परिवर्तन का अर्थ यह है कि देश में एक ऐसी सरकार है, जिसके लिए देश की संस्थाएं सर्वोपरि हैं. भारत ने देखा है कि जब भी वंशवादी राजनीति हावी हुई तो उसने देश की संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया.

पीएम ने संसद का उदाहरण देते हुए कहा कि 16वीं लोकसभा की कुल प्रोडक्टिविटी शानदार तरीके से 85% रही, जो 15वीं लोकसभा से कहीं अधिक है. वहीं 2014 से 2019 के बीच राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी 68% रही. अंतरिम बजट सत्र में लोकसभा की प्रोडक्टिविटी जहां 89% रही, वहीं राज्यसभा में यह महज 8% देखी गई.

दोनों सदनों की प्रोडक्टिविटी के इन आंकड़ों का क्या अर्थ है, इसे देश भली-भांति जानता है. यह स्पष्ट हो जाता है कि जब भी किसी गैर वंशवादी पार्टी की संख्या सदन में अधिक होती है तो उसमें स्वाभाविक रूप से अधिक काम करने की प्रवृत्ति होती है. देशवासियों को यह पूछना चाहिए कि आखिर राज्यसभा ने उतना काम क्यों नहीं किया, जितना लोकसभा में हुआ? वे कौन सी शक्तियां थीं, जिन्होंने सदन के भीतर इतना हंगामा किया और क्यों?

पीएम ने प्रेस और अभिव्यक्ति को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान और न्यायालय का भी अपमान किया. 25 जून, 1975 की शाम जब सूरज अस्त हुआ, तो इसके साथ ही भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की भी तिलांजलि दे दी गई. तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा जल्दबाजी में दिए गए रेडियो संबोधन को सुनें तो स्पष्ट होता है कि कांग्रेस एक वंश की रक्षा करने के लिए किस हद तक जा सकती है. आपातकाल ने देश को रातों-रात जेल की कोठरी में तब्दील कर दिया. यहां तक कि कुछ बोलना भी अपराध हो गया. 42वें संविधान संशोधन के जरिए अदालतों पर अंकुश लगा दिया गया. साथ ही संसद और अन्य संस्थाओं को भी नहीं बख्शा गया.