नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में बीते मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा की घटना के बाद निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है. यूं तो आगामी 19 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान के लिए 17 मई को चुनाव प्रचार की समाप्ति का दिन था, लेकिन चुनाव पूर्व हिंसा को लेकर आयोग ने ये ऐतिहासिक फैसला लिया. मगर इस फैसले से पीएम नरेंद्र मोदी को ‘छूट’ दे दी गई. चुनाव आयोग ने 16 मई की रात 10 बजे के बाद बंगाल में चुनाव प्रचार पर रोक लगाई है, इससे पहले गुरुवार को पीएम मोदी बंगाल में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले पर नाराजगी जताई है. लेकिन जहां तक पीएम मोदी की चुनावी रैलियों की बात है, इसमें गौर करने वाला तथ्य यह है कि इस लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के बाद पीएम मोदी ने बंगाल में ही सबसे ज्यादा रैलियां की हैं. यहां तक कि पश्चिम बंगाल से ज्यादा सीटों वाले और भाजपा का गढ़ माने जाने वाले महाराष्ट्र (48 सीट) में या पड़ोसी राज्य बिहार (40 सीट) में भी पीएम मोदी की चुनावी सभाएं इतनी न हुईं.

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यूपी में 31, बंगाल में पीएम मोदी की 17 रैलियां
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के स्टार प्रचारक पीएम मोदी की रैलियों के आयोजन में यूपी के बाद पश्चिम बंगाल का स्थान दूसरा है. पीएम मोदी ने बुधवार तक बंगाल में 15 चुनावी सभाएं की हैं. गुरुवार को मथुरापुर और दम दम में पीएम की दो सभाएं होनी हैं. यानी लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से पिछले करीब दो महीनों में पीएम मोदी ने बंगाल में लगभग डेढ़ दर्जन चुनावी सभाएं की हैं. वहीं उत्तर प्रदेश- जहां की वाराणसी संसदीय सीट से पीएम मोदी भाजपा के प्रत्याशी हैं और 2014 में पार्टी ने यहां सबसे ज्यादा 73 सीटें जीती थीं- में नरेंद्र मोदी ने अभी तक कुल 28 रैलियां की हैं. इसमें गुरुवार को होने वाली 3 रैलियों को जोड़ें तो यह संख्या 31 तक जाती है. गौर करें कि यूपी में बंगाल के मुकाबले लोकसभा की लगभग दोगुनी, 80 सीटें हैं. गुरुवार को पीएम मोदी मऊ, चंदौली और मिर्जापुर में चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले हैं.

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महाराष्ट्र में बंगाल से ज्यादा सीटें, रैली सिर्फ 9
पीएम मोदी लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की तरफ से स्टार प्रचारक की भूमिका में हैं. उनकी पार्टी यह चुनाव भी ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ के नारे पर ही लड़ रही है. ऐसे में पीएम मोदी के ऊपर भाजपा को चुनाव जिताने की महती भूमिका है. इसे पूरा करने में वे कोई कोर-कसर छोड़ भी नहीं रहे हैं. इसलिए पश्चिम बंगाल को भी भाजपा की ‘छांव’ में लाने के लिए वह हाड़-तोड़ मेहनत कर रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बंगाल पर भाजपा के ‘फोकस’ को इस आंकड़े से समझा जा सकता है कि महाराष्ट्र या दक्षिण भारत के कई राज्यों में लोकसभा की सीटें भले बंगाल से ज्यादा हों, लेकिन पीएम मोदी की रैलियों के मामले में ये राज्य पिछड़ गए हैं. महाराष्ट्र में बंगाल के मुकाबले लोकसभा की ज्यादा सीटें हैं. यूपी के बाद यह देश का दूसरा राज्य है जहां 48 संसदीय क्षेत्रों के लिए चुनाव हुए हैं, मगर पीएम मोदी ने राज्य में सिर्फ 9 चुनावी सभाओं को संबोधित किया है. जबकि 42 सीटों वाले राज्य बंगाल में यह आंकड़ा 17 रैलियों का है.

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दक्षिण भारत की 101 सीटों पर भी मेहरबानी नहीं
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी की बंगाल में हुई रैलियों का मुकाबला दक्षिण भारत के 4 राज्य मिलकर भी नहीं कर सके हैं. दक्षिण के 4 राज्यों- तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल और आंध्र प्रदेश में लोकसभा की कुल 101 सीटों के लिए चुनाव हुए हैं. लेकिन इन सभी राज्यों में पीएम मोदी ने कुल मिलाकर सिर्फ 9 रैलियां की हैं. यानी बंगाल की रैलियों की संख्या से लगभग आधी. इसके अलावा, बंगाल के पड़ोसी राज्य ओडिशा में, जहां लोकसभा की 21 सीटों और विधानसभा के चुनाव हुए हैं, वहां पर पीएम मोदी ने 8 चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया है. बंगाल में हुई पीएम मोदी की रैलियों का मुकाबला करने में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी पीछे हैं. इन राज्यों में हाल ही में भाजपा ने विधानसभा के चुनाव हारे हैं और यहां लोकसभा की कुल 65 सीटें हैं. अंतिम चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार समाप्त होने तक इन तीनों राज्यों में पीएम मोदी की कुल 20 सभाएं हुई हैं.

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27 राज्यों में पीएम मोदी की कुल 144 रैलियां
पीएम मोदी ने मार्च में लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले भी देश के कई राज्यों में विभिन्न सभाओं, कार्यक्रमों के जरिए भाजपा के प्रचार अभियान को धार दी थी. लेकिन चुनाव की अधिसूचना के बाद औपचारिक प्रचार अभियान शुरू कर पीएम मोदी ने पिछले लगभग ढाई महीनों में कुल 144 रैलियां की हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन 144 रैलियों में 17 मई की शाम 5 बजे तक होने वाली रैलियों या चुनावी सभाओं को भी जोड़ा गया है. जाहिर है पीएम मोदी की रैलियों की इस संख्या से एक बात बिल्कुल साफ है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा अब चौथे नंबर की पार्टी नहीं रही. बल्कि वह कांग्रेस और माकपा से आगे बढ़कर, तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी से टक्कर लेने वाली पार्टी बन गई है. बहरहाल, अब लोगों को इंतजार 23 मई का है, जब देश के 27 राज्यों में हुए लोकसभा चुनाव के मतदान का नतीजा आएगा. लोकसभा चुनाव के आने वाले नतीजे ही बताएंगे कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल या देश के अन्य राज्यों में हुई पीएम मोदी की सभाओं से वोट देने वाले मतदाताओं पर क्या फर्क पड़ा.