नई दिल्ली: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने और जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर एनडीए की सहयोगी पार्टी शिवसेना के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करेंगे. बीजेपी और शिवसेना महाराष्ट्र की 48 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ रही हैं. शिवसेना जहां 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है वही बीजेपी 25 सीटों में चुनाव लड़ेगी. हमारे सहयोगी अखबार डीएनए की एक्सक्लूसिव  रिपोर्ट के मुताबिक किशोर ने शिवसेना प्रमुख उधव ठाकरे से 5 फरवरी को मुलाकात की थी. किशोर की योजना शिवसेना की कमजोरियों और ताकत को ध्यान में रखते हुए एक विस्तृत योजना तैयार करने की है जिससे पार्टी 23 सीटों पर जीत हासिल कर सके.

शिवसेना के एक सांसद ने बताया कि किशोर जिन्हें पीके के नाम से जाना जाता है, ने क्षेत्रवार आंकड़े दिए हैं कि भाजपा से वोटों के ट्रांसफर के कारण शिवसेना को क्या लाभ होगा. विदर्भ क्षेत्र में भाजपा की पकड़ शिवसेना को उसकी स्थिति में सुधार करने में मदद करेगी, जबकि शिवसेना की सूखाग्रस्त मराठवाड़ा में उपस्थिति से भाजपा को लाभ होगा. किशोर सभी 23 निर्वाचन क्षेत्रों में कम से कम 40 व्यक्तियों की एक टीम तैनात करेंगे, जो जमीनी हकीकत का समय-समय पर विश्लेषण करेंगे और बताएंगे कि शिवसेना के पक्ष में वोटों की गिनती बढ़ाने के लिए किस तरह के कदम उठाए जाने की जरूरत है.

सांसद ने बताया कि किशोर ने अपने स्तर पर भी डेटा तैयार किया है जिसमें शिवसेना और बीजेपी के बीच असंतोष के संबंध में निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े और सदस्यों के मतभेदों को दूर करने और सीटें जीतने के तरीकों के लिए सुझाव दिया गया है. इसके अलावा, किशोर ने सभी 23 निर्वाचन क्षेत्रों में 500 से 50,000 तक वोट बढ़ाने के बारे में एक रणनीति बनाई है.

शिवसेना का कहना है कि किशोर ने मतदाताओं को बूथों तक पहुंचाने, मोहल्ला बैठकों की संख्या बढ़ाने और विशेष रूप से संयुक्त रैलियों का आयोजन करने के तरीके सुझाए हैं. यह भी कहा जा रहा है कि किशोर ने सुझाव दिया था कि शिवसेना को कोल्हापुर, सतारा, हटकनंगले, हिंगोली और पालघर सीटें जीतने का प्रयास करना चाहिए ताकि शिवसेना अपने 2014 के प्रदर्शन (18 सीटें) से आगे बढ़ सके.

इस बीच, उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिवसेना के बीच संयुक्त रैलियों के आयोजन की योजना को चाक-चौबंद करने के लिए सोमवार को शिवसेना नेताओं के साथ बैठक की. उन्होंने अपने नेताओं से यह भी सलाह ली कि सहयोगी दलों के संयुक्त अभियान को मजबूत करने के लिए राज्य में रैलियों को आयोजित करने के लिए भाजपा के किन नेताओं को आमंत्रित करना चाहिए.