पटनाः विश्व को गणतंत्र का पाठ पढ़ाने वाली धरती वैशाली में इस लोकसभा चुनाव मजेदार होने जा रहा है. इस चुनाव में यहां वादे भी हैं, राष्ट्रवाद भी है, जाति और आारक्षण के भी तराने हैं और अपने-अपने अफसाने भी हैं. लेकिन अभी तक स्थानीय समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों के दर्द महसूस करने की समझ किसी पार्टी के नेता में नहीं आई है. भगवान महावीर की जन्मस्थली से नेता लोकसभा पहुंचना तो चाहते हैं, लेकिन यहां की समस्याओं में वे अपनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. वैशाली संसदीय क्षेत्र में वैशाली जिले का केवल एक वैशाली विधानसभा आता है जबकि मुजफ्फरपुर जिले के पांच विधानसभा मीनापुर, कांटी, बरूराज, पारू और साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. Also Read - सुभाषचंद्र बोस के धर्मनिरपेक्ष विचारों के खिलाफ थे RSS के लोग, BJP को जयंती मनाने का अधिकार नहीं: कांग्रेस

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वैशाली लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला आमने-सामने का माना जा रहा है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में यह सीट लोजपा के खाते में आई है और पार्टी ने यहां से वीणा देवी को मैदान में उतारा है. महागठबंधन ने एक बार फिर यहां से पांच बार सांसद रहे राजद के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा है. Also Read - Bihar Politics: JDU नेता ने तेजप्रताप के बारे में क्यों कहा-पता नहीं जी, कौन-सा नशा करता है...जानिए

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वर्ष 1977 से पहले इस क्षेत्र में कांग्रेस का एकछत्र राज हुआ करता था, लेकिन कलांतर में कांग्रेस का वर्चस्व यहां से कम होता गया. समाजवादियों के दबदबे वाले इस क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उदय के बाद राजद का दबदबा रहा है. पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ़ रघुवंश प्रसाद सिंह यहां से लगातार पांच बार सांसद निर्वाचित हुए. वे 1996 में जनता दल तथा 1998, 1999, 2004 एवं 2009 में राजद के टिकट पर चुनाव जीते, परंतु 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रत्याशी लोजपा नेता रामा किशोर सिंह ने उन्हें शिकस्त दी.

‘छक्का’ मारने की तैयारी में

राजद के उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी यहां से ‘छक्का’ मारने की तैयारी में हैं, लेकिन इस बार भी उनके लिए यह चुनावी मैदान मारना आसान नहीं है. इस चुनावी मैदान में कई नए खिलाड़ी अपने जातीय समीकरण की ‘गुगली’ से उनके छक्का मारने को रोकने के फिराक में हैं, जबकि उन्हें भी राजपूत, यादव और मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा है. इस चुनाव में हालांकि केंद्र सरकार द्वारा संसद में लाए गए सवर्ण आरक्षण का राजद द्वारा विरोध करने पर सवर्णो में भारी नाराजगी है.

पारू विधानसभा क्षेत्र के जैतपुर कॉलेज के छात्र भानुप्रताप सिंह कहते हैं, “रघुवंश यहां से राजपूत और मुस्लिम-यादव (एम-वाय) समीकरण को जोड़कर ही पांच बार सांसद बने हैं. सवर्ण आरक्षण बिल के खिलाफ वे धरने पर बैठे थे. उन्हें राजपूत में गरीब नजर नहीं आता है? इस बार राजपूत उनके खिलाफ वोट करेगा.”

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लोजपा के समर्थकों का मानना है कि लोजपा के प्रत्याशी ना केवल राजपूत जाति के हैं, बल्कि इनके निशाने पर सवर्ण मतदाता भी हैं. हालांकि इस क्षेत्र में भूमिहार मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं, लोजपा को यकीन है कि इस समाज का वोट भी उन्हें मिलेगा. इसके अलावा लोजपा के नेता प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं. मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार पांडेय कहते हैं कि यहां से कुल 22 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला दोनों गठबंधनों में है.

उन्होंने कहा, “भले ही सभी दल के प्रत्याशी अपने स्वजातीय मतदाताओं पर भरोसा जमाए बैठे हैं, लेकिन सही मायने में इस चुनाव के परिणाम को मध्यम वर्ग के मतदाता प्रभावित करेंगे. मतदान के प्रतिशत के बढ़ने की स्थिति में राजग को लाभ मिलने की उम्मीद है.”

स्वजातीय युवा नाराज

वे कहते हैं कि राजद उम्मीदवार 72 वर्षीय रघुवंश सिंह से स्वजातीय युवा नाराज हैं, जबकि दो राजपूतों की लड़ाई में भूमिहार के रुख को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. ऐसे में किसी भी दल की स्पष्ट बढ़त नजर नहीं आ रही है. मुकाबला कांटे का है. उनका कहना है कि संभव है सिंह यह आखिरी चुनाव लड़ रहे हों. वैसे युवा मतदाता यहां के कई समस्याओं को लेकर मुखर भी हैं. युवा मतदाता नरेंद्र मोदी के राष्ट्रवाद की बात तो जरूर करते हैं, लेकिन इस क्षेत्र की समस्याओं को भी वे उठाना नहीं भूलते.

उल्लेखनीय है कि राजग उम्मीदवार वीणा देवी के पति दिनेश सिंह पहले रघुवंश प्रसाद सिंह के चुनाव की व्यवस्था संभालते थे, ऐसे में कहा जा रहा है कि सिंह के सभी रणनीति की उन्हें जानकारी है. ऐसे में वे अपनी पत्नी के लिए सिंह के आधार वोट में सेंधमारी करने के साथ-साथ उनकी चुनावी व्यूह रचना को भी भेदना चाहेंगे. बहरहाल, इस क्षेत्र में छठे चरण में 12 मई को मतदान होना है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि जातीय समीकरणों के बीच ‘राष्ट्रभक्ति’ और आरक्षण की चाल इस संसदीय क्षेत्र के परिणाम को अवश्य प्रभावित करेगा.