लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं. हालांकि, पार्टी के नेता पिछले कई दिनों से उन्हें मनाने में जुटे हैं. लेकिन सूत्रों का कहना है कि राहुल अपने फैसले पर अडिग हैं, लेकिन वह अब पार्टी को एक माह का समय देने के लिए तैयार है. इस दौरान पार्टी उनका उत्तराधिकार चुन ले. दरअसल, डीएमके नेता एमके स्टालिन और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की अपील के बाद राहुल ने अपने रुख में थोड़ी नरमी लाई है.

सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी लोकसभा में पार्टी के नेता की जिम्मेवारी उठा सकते हैं. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए कांग्रेस के पास जरूरी संख्या बल नहीं होने के कारण उसे यह पद नहीं मिलेगा. कहा जा रहा है कि अगर राहुल सदन में पार्टी का नेता बनते हैं तो उसके लिए पार्टी को उनके इस्तीफे की औपचारिक घोषणा करनी पड़ेगी.

पार्टी सूत्रों ने कहा कि राहुल ने अपना मन बना लिया है और वह बार-बार के आग्रहों पर वह विचार नहीं करने वाले. इस बीच पुराने दिग्गज नेता सक्रिय हो गए हैं और इस संकट से पार्टी को निकालने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. अंतरिम अध्यक्ष पद के लिए जिन लोगों के नाम चर्चा में चल रहे हैं, उनमें 91 वर्षीय मोतीलाल वोरा या पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शामिल हैं.

खबर है कि गांधी परिवार के वफादार अहमद पटेल और मोतीलाल वोरा सोनिया गांधी के साथ मिलकर भावी कार्ययोजना पर सीधे तौर पर काम कर रहे हैं. पार्टी के अंदर के सूत्रों ने कहा कि अंतरिम अध्यक्ष पार्टी के युवा नेताओं जैसे अशोक चव्हाण, गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा, सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुष्मिता देब की सदस्यता वाले एक अध्यक्ष मंडल के साथ काम करेगा. कांग्रेस पार्टी को हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भारी हार का सामना करना पड़ा है. पार्टी मात्र 52 सीटें जीतने में कामयाब हो सकी है, जबकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 300 से अधिक सीटें जीती है.