नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद इस पर मंथन करने के लिए कांग्रेस कार्यकारिणी समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक चल रही है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की. वह इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन सीडल्ब्यूसी ने उनका इस्तीका स्वीकार नहीं किया. सीडल्ब्यूसी ने हालांकि उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया. वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश नहीं की है. पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी वह ही संभालेंगे. उन्होंने मीडिया में आईं इन ख़बरों को खारिज किया है.

बता दें कि लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद आज दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक हो रही है. CWC कांग्रेस पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था है. इस बैठक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा सोनिया गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मोतीलाल वोहरा, दीपेंद्र हुड्डा सहित तमाम नेता शामिल हुए. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित, गुलाम नबी आजाद जैसे तमाम नेता शामिल हुए हैं.

इस बैठक से पहले यही चर्चा चल रही थी कि कांग्रेस पार्टी की बुरी हार के बाद क्या राहुल गांधी इस्तीफा देंगे. अगर वह इस्तीफा देते हैं तो क्या सीडब्ल्यूसी उसे स्वीकार करेगी. सूत्रों का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी सीडब्ल्यूसी की बैठक में अपने इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं. यह जानकारी उस वक्त आई है कि जब पार्टी के कई स्थानीय नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख राज बब्बर ने पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया है. ओडिशा में लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में हार के मद्देनजर प्रदेश कांग्रेस समिति अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने भी शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफे की घोषणा की.

सीडब्ल्यूसी की बैठक के संदर्भ में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा था, ‘‘सीडब्ल्यूसी की बैठक में मुख्य रूप से हार के कारणों पर विचार किया जाएगा. इस बारे में भी चर्चा होगी कि पार्टी को किस तरह से मजबूत किया जा सकता है.’’ कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है. वह 52 सीटों पर सिमट गई है. 2014 के चुनाव में 44 सीटें जीतने वाली पार्टी को इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन उम्मीद पूरी नहीं हो सकी.