बिहार की सारण लोकसभा सीट हमेशा से चर्चित रही है. कभी इस सीट पर लालू प्रसाद यादव की तूती बोलती थी तो कभी यह क्षेत्र संपूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण की कर्म भूमि था. लालू यहां से चार बार सांसद रह चुके हैं. यह उनके परिवार की पारंपरिक सीट मानी जाती है, लेकिन चारा घोटाले में लालू को सजा मिलने के बाद से यहां का समीकरण बदल गया है. इस बार भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव प्रताप रूड़ी मैदान में हैं. उन्हें राजद के चंद्रिका राय चुनौती दे रहे हैं. चंद्रिका राय लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के ससुर हैं. रूड़ी इस बार इस सीट से चौका लगाने की फिराक में हैं. रूड़ी पेशेवर कमर्शियल पायलट हैं.

‘संपूर्ण क्रांति’ के जनक जयप्रकाश नारायण की कर्मभूमि रहे सारण की राजनीति में लालू प्रसाद लंबे समय तक केंद्र बिंदु रहे हैं. सारण की विशेषता रही है कि यहां पार्टियां भले ही अपने उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती हैं, परंतु मुख्य मुकाबला यदुवंशी और रघुवंशी के बीच का ही होता है. पिछले लोकसभा चुनाव में सारण की सीट से भाजपा के रूड़ी ने राजद की राबड़ी देवी को पराजित किया था. उस चुनाव में रूड़ी को जहां 41 फीसदी से ज्यादा मत मिले थे, वहीं राबड़ी को 36 प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा था.

सारण संसदीय क्षेत्र में मढ़ौरा, छपरा, गरखा, अमनौर, परसा तथा सोनपुर विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इसमें से चार विधानसभा क्षेत्र पर राजद, जबकि दो पर भाजपा का कब्जा है. पहले इस संसदीय सीट का नाम छपरा होता था. अभी भी इस क्षेत्र का नाम भले ही बदला गया है, लेकिन इसका मिजाज अब तक नहीं बदला है. प्रारंभ से ही इस क्षेत्र में जीत-हार का निहितार्थ जातीय दायरे के इर्द-गिर्द घूमते हैं. यहं पार्टियां नहीं, बल्कि जातियां जीतती रही हैं.

चार बार सांसद रहे हैं लालू
इस सीट से लालू प्रसाद सर्वाधिक चार बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे तो उन्हें यहां से हार का सामना भी करना पड़ा है. वैसे रूड़ी ने वर्ष 1996 में न केवल जीत दर्ज कर यहां भाजपा का खाता खुलवाया था, बल्कि 1999 और 2014 में भी रूड़ी ने यहां ‘कमल’ खिलाया था. इस बार लालू की विरासत को संभालने के लिए चुनावी मैदान में उतरे राजद विधायक चंद्रिका राय को यहां से जीतना न केवल लालू के लिए, बल्कि पूरी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है.

जेपी़ विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रोफेसर चंद्रभूषण तिवारी कहते हैं, “भाजपा के लोगों को नरेंद्र मोदी तथा रूड़ी के व्यक्तित्व और उपलब्धियों पर भरोसा है, जबकि राजद अपने वोट बैंक पर टिकी है. यहां से कुल 12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, परंतु मुख्य मुकाबला दोनों गठबंधन के बीच है.”

सोनपुर के पत्रकार विश्वनाथ सिंह बताते हैं, “राजपूत और यादव बहुल सारण संसदीय क्षेत्र में निर्णायक वोट वैश्यों और मुस्लिमों का माना जाता है. एम-वाय यानी मुस्लिम और यादव समीकरण बनाकर लालू प्रसाद इस सीट से चार बार सांसद रहे हैं, जबकि राजपूत और वैश्यों की गोलबंद कर भाजपा के रूड़ी इस सीट से तीन बार चुने गए. इस चुनाव में भी जातीय समीकरण की गोलबंदी से ही परिणाम तय होगा.”

बहरहाल, सारण सीट की पहचान रूड़ी और लालू प्रसाद के कारण राष्ट्रीय फलक पर रही है. इस क्षेत्र में पांचवें चरण में छह मई को मतदान होना है. परंतु 23 मई को मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि यहां के लोग रूड़ी को एक बार फिर संसद भेजते हैं या फिर लालू के रिश्तेदार चंद्रिका राय को.

(इनपुट-आईएएनएस)