नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव प्रचार के चार चरणों के बाद चुनावी घमासान अब धीरे-धीरे अपने मंजिल की ओर पहुंच रहा है. पांचवें चरण में 7 राज्यों की 51 लोकसभा सीटों के लिए मतदान होना है. इन सीटों में से एक नवाबों के शहर के रूप में मशहूर लखनऊ लोकसभा क्षेत्र भी है. इस सीट से भाजपा के दिग्गज नेता और गृह मंत्री राजनाथ सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. उनके खिलाफ सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने पूनम सिन्हा को चुनाव मैदान में उतारा है. पूनम सिन्हा, भाजपा से हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी हैं. देश की कई लोकसभा सीटों पर चुनाव के दौरान जहां उम्मीदवारों के बीच तीखी जुबानी जंग, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप जैसे दृश्य हमने देखे हैं. लेकिन लखनऊ चूंकि तहजीब का शहर कहा जाता है, इसलिए यहां के चुनाव प्रचार में आपको न तो एक-दूसरे के प्रति तीखी बयानबाजी दिखेगी और न ही छींटाकशी वाले आरोप सुनाई देंगे. Also Read - बिहार विधान परिषद जाएंगे पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन, बीजेपी ने दिया एमएलसी का टिकट

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अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, लखनऊ में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उम्मीदवारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जैसी कोई बात नहीं दिखती. दोनों ही गठबंधनों के प्रत्याशी एक-दूसरे को लेकर निजी हमले नहीं कर रहे हैं. बल्कि दोनों प्रत्याशियों के प्रचार में लखनऊ का विकास ही मुद्दा है. राजनाथ सिंह और पूनम सिन्हा, दोनों ही अपने-अपने चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न धर्म और समुदाय के लोगों के साथ मुलाकात करते हैं, लेकिन दोनों ही व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी से परहेज करते हैं. लोकतंत्र की यह खूबसूरती तहजीब के शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है. Also Read - Army Day 2021: BJP ने सेना दिवस के अवसर पर साझा किया बेहतरीन वीडियो, दिखा जवानों का पराक्रम

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अखबार के मुताबिक, बीते दिनों भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह एक मदरसा में पहुंचे, जहां उन्हें छात्रों ने घेर लिया. इन छात्रों में गृह मंत्री के साथ सेल्फी लेने की होड़ दिखी. वहीं, राजनाथ भी इन लोगों से काफी गर्मजोशी से मिले. दारूल उलूम नदवातुल उलेमा के मौलाना रबी हासमी नदवी के अलावा गृह मंत्री ने शहर के कई और मुस्लिम नेताओं से मुलाकात की. इन सभी मुलाकातों के दौरान उन्होंने एक बार भी अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की. अलबत्ता इस दौरान उन्होंने लखनऊ में केंद्र सरकार द्वारा कराए गए कार्यों और उपलब्धियों की चर्चा जरूर की. ठीक इसी तरह सपा प्रत्याशी पूनम सिन्हा भी चुनाव प्रचार के दौरान सिर्फ और सिर्फ विकास की बातें करती ही दिखती हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, पूनम सिन्हा ने प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के खिलाफ बोलने को लेकर स्पष्ट भी किया कि वह क्यों इस तरह के बयान से परहेज कर रही हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरे पति शत्रुघ्न सिन्हा ने मुझे सिखाया है कि मैं इस तरह की किसी बातों में न उलझूं. मेरे पति ने मुझे बताया कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी या भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी से राजनीति में मर्यादित आचरण करना सीखा है. मैं इसी का पालन कर रही हूं.’ लखनऊ में विकास की बातों को लेकर पूनम सिन्हा ने कहा, ‘किसी ने भी लखनऊ में वैसा काम नहीं किया, जैसा हमारे नेता अखिलेश यादव ने कर के दिखाया है. लखनऊ मेट्रो, गोमती नदी का सौंदर्यीकरण या लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे, ये सब कुछ ऐसे काम हैं जिनके आधार पर मैं कह सकती हूं कि लखनऊ के मतदाता हमें ही चुनेंगे.’

बहरहाल, लोकसभा चुनाव के रण में जिस तरह निजी छींटाकशी, आरोप-प्रत्यारोप और निचले स्तर की बयानबाजी देखने को मिल रही है, उसके बीच लखनऊ का चुनाव लोकतंत्र की खूबसूरती को दर्शाता है. हम अपने नेताओं और रहनुमाओं से यह उम्मीद तो कर ही सकते हैं कि वे राजनाथ सिंह और पूनम सिन्हा जैसे अपने समकक्षों से चुनाव के दौरान भी मर्यादित रहने की तहजीब सीख सकते हैं.