नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के 6 चरणों के मतदान हो चुके हैं. आखिरी चरण के चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में फिर से गर्माहट देखने को मिल रही है. इसकी वजह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की एक चिट्ठी है, जो उन्होंने सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नाम लिखी है. राजद सुप्रीमो लालू यादव ने नीतीश कुमार के नाम लिखे खत में उन्हें ‘छोटे भाई’ कहकर संबोधित किया है. लालू यादव ने खत में कहा है कि राजद का चुनाव चिह्न ‘लालटेन’ रोशनी फैलाने वाला है. यह हमेशा जलता रहेगा और अंधेरा दूर भगाएगा, जबकि जदयू (JDU) के ‘तीर’ (पार्टी का चुनाव चिह्न) का जमाना लद गया है. अब इसे संग्रहालय में रखे जाने की जरूरत है.Also Read - RRB NTPC Group D Exam 2022: बिहार बंद को लेकर नीतीश कुमार पर फूटा तेज प्रताप का गुस्सा, केंद्र पर साधा निशाना

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राजद सुप्रीमो ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे खत में उनकी ‘राजनीति’ को लेकर भी टिप्पणी की है. लालू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई अपनी चिट्टी में कहा है, ‘ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तुम्हें आजकल उजालों से कुछ ज़्यादा ही नफ़रत सी हो गई है. दिनभर लालू और उसकी लौ लालटेन-लालटेन का जाप करते रहते हो. तुम्हें पता है कि नहीं, लालटेन प्रकाश और रोशनी का पर्याय है. मोहब्बत और भाईचारे का प्रतीक है. गरीबों के जीवन से तिमिर हटाने का उपकरण है. हमने लालटेन के प्रकाश से ग़ैरबराबरी, नफ़रत, अत्याचार और अन्याय का अंधेरा दूर भगाया है और भगाते रहेंगे. तुम्हारा चिह्न तीर तो हिंसा फैलाने वाला हथियार है. मार-काट व हिंसा का पर्याय और प्रतीक है.’ Also Read - एयरपोर्ट अफसरों ने हेलीकॉप्‍टर की उड़ान में देरी की वजह बताई तो अखिलेश बोले- मुझे कैसे पता होगा कि क्या कारण था

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लालू यादव ने नीतीश को लिखे पत्र में राजनीति के सिद्धांतों की भी याद दिलाई है. उन्होंने लिखा है, ‘और हां जनता को लालटेन की ज़रूरत हर परिस्थिति में होती है. प्रकाश तो दिए का भी होता है. लालटेन का भी होता है और बल्ब का भी होता है. बल्ब की रोशनी से तुम बेरोज़गारी, उत्पीड़न, घृणा, अत्याचार, अन्याय और असमानता का अंधेरा नहीं हटा सकते. इसके लिए मोहब्बत के साथ खुले दिल और दिमाग़ से दिया जलाना होता है.’ राजद सुप्रीमो ने अपनी चिट्ठी में कहा है, ‘समानता, शांति, प्रेम और न्याय दिलाने के लिए ख़ुद को दिया और बाती बनना पड़ता है. समझौतों को दरकिनार कर जातिवादी, मनुवादी और नफ़रती आंधियों से उलझते व जूझते हुए ख़ुद को निरंतर जलाए रहना पड़ता है. तुम क्या जानो इन सब वैचारिक और सैद्धांतिक उसूलों को. डरकर शॉर्टकट ढूंढना और अवसर देख समझौते करना तुम्हारी बहुत पुरानी आदत रही है.’

राजद सुप्रीमो ने बिहार के सत्ताधारी दल जदयू के प्रमुख को लिखी चिट्ठी में उनकी पार्टी के चुनाव चिह्न (तीर) के पुराने पड़ जाने की बात भी कही है. साथ ही यह तंज भी कसा है कि अब ‘तीर’ को संग्रहालय में ही रखा जाना है. लालू यादव ने नीतीश कुमार को संबोधित अपने खत में कहा है, ‘और हां तुम कहां मिसाइल के ज़माने में तीर-तीर किए जा रहे हो? तीर का ज़माना अब लद गया. तीर अब संग्रहालय में ही दिखेगा. लालटेन तो हर जगह जलता दिखेगा और पहले से अधिक जलता हुआ मिलेगा क्योंकि 11 करोड़ ग़रीब जनता की पीठ में तुमने विश्वासघाती तीर ही ऐसे घोंपे है. बाक़ी तुम अब कीचड़ वाले फूल में तीर घोंपो या छुपाओ. तुम्हारी मर्ज़ी.’

राजद प्रमुख की इस चिट्ठी से बिहार का सियासती माहौल गर्माने का असर है. हालांकि लोकसभा चुनाव में अब जबकि सिर्फ एक ही चरण का मतदान शेष है, ऐसे में राजद प्रमुख की यह चिट्ठी उनकी पार्टी को कितना फायदा पहुंचाएगी या नीतीश कुमार के जदयू का कितना नुकसान करेगी, इसका पता तो 23 मई की मतगणना के बाद ही चलेगा. लेकिन चर्चा में बने रहने के लिए मशहूर लालू यादव ने जेल में रहते हुए भी नीतीश कुमार के नाम खत लिखकर संभावनाओं से भरे राजनीतिक परिदृश्य को एक बार फिर गर्माने का काम तो कर ही दिया है.