नई दिल्ली/भोपाल. लोकसभा सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ बीजेपी साध्वी प्रज्ञा को उतार सकती है. साध्वी प्रज्ञा बुधवार को भोपाल स्थित बीजेपी के दफ्तर पहुंची. उनके साथ मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के संगठन के नेता राम लाल और प्रभात झा भी मौजूद हैं. करीब 18 लाख मतदाताओं वाली भोपाल संसदीय सीट पर करीब 4.5 लाख मुस्लिम मतदाता हैं.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय को उनके पूर्व में दिये गये बयानों में संघ परिवार पर बार-बार हमला करने के लिए कट्टर हिन्दूवादी उन्हें हिन्दू विरोधी मानते हैं. बता दें कि इससे पहले जब साध्वी प्रज्ञा के नाम की चर्चा थी तो साध्वी ने कहा था कि मैं धर्म युद्ध लड़ने के लिए तैयार हूं. पिछले तीन दशकों से भोपाल लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ रही है.

राघौगढ़ राजघराने से ताल्लुक रखने वाले दिग्विजय अपने गृह जिले स्थित राजगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कमलनाथ ने उन्हें मुश्किल सीट भोपाल पर चुनाव लड़ने को कहा. राजगढ़ से वह साल 1984 एवं 1991 में कांग्रेस की टिकट पर जीत कर सांसद रह चुके हैं.

8 में से सिर्फ 3 विधानसभा साथ
भोपाल संसदीय सीट में 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में इनमें से 3 सीटों पर कांग्रेस जीती थी, जबकि भाजपा 5 सीटों पर जीती थी. हालांकि, भाजपा को इन 8 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस से करीब 63,000 ज्यादा मत मिले थे. कांग्रेस ने साल 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट जीती थी. तब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में कांग्रेस की लहर थी, जिसके चलते भोपाल से के.एन. प्रधान जीते थे.

बीजेपी का है कब्जा
इस सीट पर पिछले 30 साल से भाजपा का कब्जा है. इस सीट को भाजपा ने वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से छीना था और तब से लेकर अब तक इस सीट पर आठ बार चुनाव हुए हैं और आठों बार भाजपा ने कांग्रेस के प्रत्याशियों को धूल चटायी है. भोपाल के मौजूदा सांसद आलोक संजर हैं और उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट से 3.70 लाख से अधिक मतों से विजय प्राप्त की थी. भोपाल सीट पर 12 मई को मतदान होगा.