भोपाल: एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे एवं बाबरी मस्जिद पर की टिप्पणियों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से प्रचार करने पर अपने ऊपर लगे 72 घंटे के प्रतिबंध के बाद भोपाल लोकसभा सीट की भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर बृहस्पतिवार को मौन धारण कर विभिन्न मंदिरों में दर्शन करने गईं और हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा अर्चना की. इस दौरान उन्होंने मंदिरों की गौशालाओं में पाले जा रहे गाय और बछड़ों को गुड़ और घास भी खिलाया.

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने भी चुनाव आयोग द्वारा उन पर भड़काऊ एवं सांप्रदायिक टिप्पणी करने के मामले में 72 घंटे तक चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाने के बाद पिछले महीने भी ऐसा ही किया था. मध्य प्रदेश भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेई ने बताया कि मौन धारण कर साध्वी प्रज्ञा ने बृहस्पतिवार सुबह शहर के सोमवारा भवानी चौक पहुंचकर ‘कर्फ्यू वाली माताजी’ के दर्शन किए और दरबार में श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया. इस मौके पर उनके साथ भोपाल महापौर आलोक शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष सुरजीत सिंह चैहान सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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प्रज्ञा ठाकुर पर 72 घंटे का लगा है बैन
उन्होंने कहा कि कुछ देर मंदिर में बैठने के बाद वह शहर के लालघाटी स्थित गुफा मंदिर पहुंची, जहां उन्होंने महंत श्री चंद्रमादास जी से आशीर्वाद लिया. इसके बाद वह मंदिर स्थित गौशाला गईं और उन्होंने गाय-बछड़े को गुड़ और घास खिलाई. एक मंदिर में वह भजन कर रहे भक्तों के बीच में खड़ी भी देखी गई. हालांकि, उन्होंने किसी से कोई बात नहीं की. एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे एवं बाबरी मस्जिद पर की टिप्पणियों के लिए चुनाव आयोग द्वारा प्रज्ञा ठाकुर पर 72 घंटे तक प्रचार करने से रोक लगाया गया है, जो बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे से लागू है.

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ये दिया था बयान
मालूम हो कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण की समयसीमा के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में एक टीवी चैनल को प्रज्ञा ने 20 अप्रैल को कहा था कि राममंदिर हम बनाएंगे एवं भव्य बनाएंगे. हम तोड़ने गये थे (बाबरी मस्जिद का) ढांचा. मैंने चढ़कर तोड़ा था ढांचा. मुझे ईश्वर ने शक्ति दी थी. हमने देश का कलंक मिटाया है. इससे पहले भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में मुम्बई एटीएस के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे पर जेल में यातना देने का आरोप लगाते हुए प्रज्ञा ने कहा था कि मैंने करकरे सर्वनाश होने का श्राप दिया था और इसके सवा माह बाद आतंकवादियों ने उन्हें मार दिया. हालांकि, इस बयान के एक दिन बाद चारों तरफ से आलोचना होने के बाद प्रज्ञा ने अपना बयान वापस ले लिया था और माफी भी मांग ली थी.

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