शिमला: कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने 1984 के सिख दंगों के संबंध में अपनी विवादास्पद टिप्पणी के लिए शुक्रवार को सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी हिंदी अच्छी नहीं है, और इसलिए उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया. इंडियन ओवरसीस कांग्रेस के अध्यक्ष पित्रोदा ने गुरुवार को 1984 के सिख विरोधी दंगे को यह कहकर खारिज कर दिया था, “हुआ तो हुआ.” पित्रोदा ने शुक्रवार को मीडियाकर्मियों से कहा, “मेरे बयान को पूरी तरह अलग रंग दिया गया और उसे संदर्भ से बाहर लिया गया, क्योंकि मेरी हिंदी अच्छी नहीं है. मेरा मतलब था ‘जो हुआ वो बुरा हुआ’. लेकिन मैं बुरा का अनुवाद अपने दिमाग में नहीं कर सका.”

बता दें कि खबरों के मुताबिक पित्रोदा ने गुरुवार को कहा था कि अब क्या है 84 का? आपने (नरेंद्र मोदी) पांच साल में क्या किया, उसकी बात करिए. 84 में जो हुआ, वो हुआ. इस मामले पर विवाद खड़ा होने के बाद पित्रोदा ने कहा कि भाजपा अपनी नाकामियां छिपाने के लिए उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है.

बता दें कि पित्रोदा का बयान आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1984 सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में हुआ तो हुआ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा और उनकी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए शुक्रवार को कहा कि यह विपक्षी दल का चरित्र और अहंकार दिखाता है. हिमाचल प्रदेश के मंडी में मोदी ने कहा कि यह बयान कांग्रेस के अहंकार को दिखाता है और यह मानसिकता विपक्षी पार्टी को 2014 की 44 सीटों से भी नीचे ले जाएगी. मोदी ने कहा, हुआ तो हुआ. यह कांग्रेस की मानसिकता को दिखाता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दंगों के लिए इतने सालों तक किसी को न्याय के कठघरे में नहीं लाया गया. मोदी ने कहा कि यह कांग्रेस का अहंकार है जो उसे 44 सीटों तक ले आया था. इस बार जनता इन्हें और भी नीचे पहुंचा देगी. मोदी ने कहा था, हमारी सरकार 1984 में कांग्रेस के नामदारों के किये पापों के लिए न्याय दिलाने का काम कर रही है. पहली बार सिख विरोधी दंगों के लिए न्याय किया जा रहा है. इन्हें अंजाम देने वालों को उम्रकैद और मौत की सजा दी जा रही हैं.

जबकि कांग्रेस ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में सैम पित्रोदा के बयान से शुक्रवार को दूरी बनाते हुए इसे उनकी निजी राय करार दिया और कहा कि पार्टी के नेता बयान देते समय सावधान और संवेदनशील रहें. कांग्रे अध्‍यक्ष राहुलन गांधी ने एक समाचार वेबसाइट के साथ बातचीत में कहा, “मुझे लगता है कि सैम पित्रोदा जी ने जो कहा है वो पार्टी लाइन से पूरी तरह अलग है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि 1984 एक ऐसी त्रासदी थी, जिसने बहुत पीड़ा दी. न्याय होना चाहिए. जो लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं उन्हें सजा मिलनी चाहिए।’ गांधी ने कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माफी मांगी, मेरी मां सोनिया गांधी ने माफी मांगी. हम सबने अपना रुख स्पष्ट कर दिया कि वह एक भयावह त्रासदी थी जो नहीं होनी चाहिए थी.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, हिंसा, दंगे, आपसी वैमन्स्य निंदनीय हैं और इन्हें किसी भी तरह से माफ नहीं किया जा सकता। कांग्रेस ने किसी भी दूसरी पार्टी के मुकाबले अधिक प्रयास किया है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपियों कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिले, साथ साथ पीड़ितों को पूर्ण न्याय मिले, उनका पुनर्वास हो. किसी व्यक्ति द्वारा कोई भी टिप्पणी (यदि) मेरे वक्तव्य से मेल नहीं खाता तो वो पार्टी की राय नहीं हो सकती। हम उसे नकारते हैं. हम स्पष्ट करते हैं कि यह हमारा रुख नहीं है. यह जरूरी है कि पार्टी का हर नेता इस रुख को समझे और जो भी कहे वो पार्टी के रुख से मेल खाए. (इनपुट: भाषा/आईएएनएस)