नई दिल्लीः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार के बीच हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें शुरू हो गई हैं कि दोनों पार्टियों का विलय हो सकता है. बहरहाल, दिल्ली और महाराष्ट्र में दोनों पार्टियों के नेताओं ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है कि गांधी और पवार की मुलाकात के दौरान विलय पर कोई चर्चा हुई. अगर दोनों पार्टियों का विलय होता है तो लोकसभा में कांग्रेस पार्टी ‘नेता प्रतिपक्ष’ के जरूरी संख्या बल को हासिल कर लेगी. अभी कांग्रेस के 52 और एनसीपी के पांच सांसद हैं. इस तरह यह संख्या 57 हो जाएगी और कांग्रेस पार्टी को सदन में नेता प्रतिपक्ष का पद मिल जाएगा.

गौरतलब है कि शरद पवार 1983 में कांग्रेस से अलग होकर कांग्रेस-सोशलिस्ट पार्टी बनाई थी. इसके तीन साल बाद ही हाल उन्होंने राजीव गांधी के साथ औरंगाबाद की एक रैली में पार्टी का कांग्रेस में विलय करा दिया. इसके बाद 1999 में शरद पवार ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल होने को मुद्दा बनाकर कांग्रेस से अलग हो गए और उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई. बाद में कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते ठीक हो गए. दोनों पार्टियों ने महाराष्ट्र में गठबंधन कर लिया. शरद पवार खुद मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री रहे.

पवार ने कहा कि उन्होंने और गांधी ने महाराष्ट्र में कुछ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव और राज्य में सूखे के हालात पर चर्चा की है. दिल्ली में पवार और गांधी के बीच करीब 55 मिनट की मुलाकात हुई जिसके बाद दोनों पार्टियों में विलय की अटकलें आरंभ हो गईं. इस बारे में पूछे जाने पर राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि पार्टी के भीतर इस बारे में कोई चर्चा नहीं है.

दूसरी तरफ, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा, ‘जब दो पार्टियों के नेता मिलते हैं तो राजनीति पर चर्चा होती है. अगर दोनों पार्टियां साथ आती हैं तो इससे वोटों के बंटवारे को रोकने में मदद मिलेगी. परंतु दोनों पार्टियों के विलय के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है.’

(इनपुट-भाषा)