पटना. देश में लगी इमरजेंसी के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलन से जन्मे कई नेता आज दिग्गज राजनीतिज्ञों में से एक माने जाते हैं. ऐसे नेता जिन पार्टियों में हैं, वे या तो उसके संस्थापक हैं या उन्हें वरिष्ठ का दर्जा प्राप्त है. लेकिन इन्हीं नेताओं में से एक शरद यादव भी है, जिनका नाम इस आंदोलन के बाद कई पार्टियों में शामिल रहने या नई पार्टियों के संस्थापक नेताओं के तौर पर जाना जाता है. बिहार में महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो जाने के बाद एक बार फिर शरद यादव चर्चा में आए. इस बार भी उनका नाम, उनकी नई पार्टी, लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) के नेता के तौर पर लिया गया. लेकिन साथ में यह भी जोड़ा गया कि वे लोकसभा का चुनाव अपने दल से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के चुनाव चिह्न पर लड़ेंगे. इसके अलावा यह भी बात सामने आई कि चुनावों के बाद उनकी पार्टी का विलय राजद में हो जाएगा.

बिहार में इस फॉर्मूले के तहत हुआ महागठबंधन की सीटों का बंटवारा

जनता पार्टी, जनता दल, जनता दल युनाइटेड जैसी कई पार्टियों के संस्थापक सदस्य रहे कद्दावर नेता शरद यादव मूलतः मध्यप्रदेश के निवासी हैं, लेकिन उनकी सियासी सरजमीं बिहार रही है. बिहार के मधेपुरा से वे सांसद रहे हैं. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जिस मधेपुरा संसदीय सीट (Madhepura constituency) से उन्होंने जद(यू) के टिकट पर राजद के खिलाफ चुनाव लड़ा था, इस बार उसी राजद के टिकट पर वे अपना भाग्य आजमाएंगे. यानी जिस पार्टी ने उन्हें पिछले चुनावों में हराया था, सियासी स्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि शरद यादव को इस बार लोकसभा में पहुंचने के लिए उसी पार्टी का सहारा लेना पड़ा. बिहार में विपक्ष के महागठबंधन में सीट बंटवारे की घोषणा करते हुए राजद प्रवक्ता मनोज झा ने पटना में शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में कहा कि लोजद प्रमुख शरद यादव ने इसके लिए हामी भर दी है.

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राजद प्रवक्ता ने कहा, “शरद यादव राजद के निशान पर चुनाव लड़ेंगे. चुनाव के बाद उनकी पार्टी का राजद में विलय हो जाएगा.” सूत्रों का कहना है कि जनता दल (युनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव मधेपुरा से राजद के चुनाव चिह्न् पर चुनाव लड़ेंगे. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी शरद मधेपुरा से बतौर जद (यू) उम्मीदवार चुनाव लड़े थे, लेकिन जीत नहीं पाए. उस समय वह जद (यू) अध्यक्ष भी थे. बाद में नीतीश कुमार जद (यू) अध्यक्ष बने. जद (यू) ने शरद को राज्यसभा भेज दिया. वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को बहुमत मिला था. लेकिन वर्ष 2017 में जद (यू) ने महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली. इसे ‘जनादेश का अपमान’ बताते हुए शरद जद (यू) से अलग हो गए और अपनी नई पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) बना ली.

(इनपुट – एजेंसी)