नई दिल्ली. पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा शनिवार को औपचारिक तौर पर कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले ली. कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा ने बौद्धिक, वैचारिक और राजनैतिक तौर पर कांग्रेस की सदस्यता ली है. उन्होंने कहा कि शत्रुघ्न शुरू से नेहरू, पटले, इंदिरा से प्रभावित रहे हैं और अब उनका कांग्रेस में आना पार्टी को मजबूती देगा. Also Read - Nathuram Godse की मूर्ति लगाने में शामिल रहे Hindu Mahasabha के नेता ने ज्‍वाइन की Congress, एमपी में सियासत गर्माई

इस मौके पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, देश के निर्माता गांधी, नेहरू और पटेल की पार्टी है कांग्रेस. उन्होंने कहा, आज पार्टी का स्थापना दिवस है.उन्होंने बताया कि किस तरह से नाना जी देशमुख उन्हें पार्टी में लेकर आएं और अटल-आडवाणी का मार्गदर्शन मिला, उससे आगे बढ़ता गया. उन्होंने कहा कि वह यशवंत सिन्हा, मुरली मनोहर जोशी से लेकर आडवाणी और सुमित्रा महाजन के साथ किसी तरह का सलूक हुआ है. Also Read - कांग्रेस का एक तीर से दो निशाना की रणनीति, मनोहर लाल खट्टर से अधिक दुष्यंत चौटाला चिंतित

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, टैलेंट कहीं है तो भारतीय कांग्रेस में है. नोटबंदी विश्व का सबसे बड़ा घोटाला है. जीएसटी से व्यापार तबाह हो गया. मोदी ने अपनी मां तक को लाइन में लगा दिया. उन्होंने कहा कि वादे किए जा रहे हैं. पार्टी में पता नहीं किस तरह से नए सदस्य बनाया जा रहा है. मैं तो साक्षी रहा हूं. उन्होंने कहा कि बीजेपी वन मैन शो और टू मैन आर्मी हो गई है. Also Read - Video: Congress Leader Rahul Gandhi ने समुद्र में लगाई डुबकी, तैरते हुए भी आए नजर

सीनियर नेताओं के साथ गलत व्यवहार
शत्रुघ्न सिन्हा लंबे समय से मोदी सरकार की आलोचना कर रहे थे. उन्होंने कहा, बीजेपी जिससे मैं लंबे समय से जुड़ा था, उसे छोड़ना मेरे लिये ‘‘पीड़ादायक’’ था. लेकिन एल. के. आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ जिस तरह से बर्ताव किया गया, उससे मैं आहत था. बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं आडवाणी और जोशी को इस बार चुनाव मैदान में नहीं उतारा है.

तानाशाही का आरोप लगाया
उन्होंने भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी प्रमुख अमित शाह के नेतृत्व की आलोचना की और कहा कि इससे पहले पार्टी में ‘लोकशाही’ थी और अब ‘तानाशाही’ है. उन्होंने कहा, हमारे पारिवारिक मित्र (राजद प्रमुख) लालू प्रसाद ने भी सुझाव दिया ‘आप वहां (कांग्रेस में) जायें. हम लोग वहां आपके साथ हैं और राजनीतिक रूप से भी साथ बने रहेंगे। यह उनकी (लालू प्रसाद की) सहमति और उनके साथ समझौते के तहत हुआ. उन्होंने कहा कि अहम कारक यह है कि पटना साहिब सीट महागठबंधन के सीट बंटवारे में कांग्रेस के खाते में गयी. उन्होंने कहा भी था कि सिचुएशन (परिस्थिति) जो भी हो लेकिन लड़ूंगा उसी सीट से.