नई दिल्ली. वाराणसी लोकसभा सीट से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेजबहादुर यादव को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया. वाराणसी सीट से नामांकन पत्र खारिज होने के बाद चुनाव लड़ने की अनुमति देने संबंधी उनकी याचिका कोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हमें इस याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं लगता लिहाजा याचिका खारिज की जाती है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को निर्वाचन आयोग से कहा था कि वह तेज बहादुर यादव तेज बहादुर यादव का वाराणसी संसदीय सीट पर नामांकन रद्द होने के मामले में उसकी शिकायतों पर गौर करे. यादव ने वाराणसी संसदीय सीट पर पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था. बाद में समाजवादी पार्टी की ओर से भी उन्हें समर्थन दिया था.

लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें India.com

आपको बता दें कि बुधवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा था कि वह आवश्यक निर्देश प्राप्त करके गुरुवार को उसे अवगत कराएं. इसी आलोक में चीफ जस्टिस की पीठ ने गुरुवार को मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस याचिका पर सुनवाई को कोई आधार नहीं है. इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है. इससे पहले बुधवार को तेज बहादुर यादव के वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान भी चुनाव याचिका दायर की जा सकती है.

रोहतक में चुनावी सभा के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू की ओर महिला ने फेंकी चप्पल

निर्वाचन अधिकारी द्वारा वाराणसी संसदीय सीट पर तेज बहादुर यादव का नामांकन रद्द होने के बाद बीएसएफ के बर्खास्त जवान ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. यादव का कहना है कि ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘‘वाक ओवर’’ देने के लिए किया गया. निर्वाचन अधिकारी ने एक मई को समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी यादव का नामांकन पत्र रद्द कर दिया था. यादव को सीमा सुरक्षा बल में जवानों को मिलने वाले भोजन के बारे में शिकायत संबंधी एक वीडियो पोस्ट करने की घटना के बाद 2017 में सुरक्षा बल से बर्खास्त कर दिया गया था.

चुनाव अधिकारी का कहना था कि यादव जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत यह अनिवार्य प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सके थे कि उन्हें भ्रष्टाचार या राज्य के प्रति निष्ठाहीनता के लिए बर्खास्त नहीं किया गया है. यादव ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग के फैसले को पक्षपातपूर्ण और तर्कहीन बताते हुए इसे निरस्त करने और वाराणसी सीट पर 19 मई को होने वाले चुनाव में शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध न्यायालय से किया था. वाराणसी संसदीय सीट के लिए समाजवादी पार्टी ने शुरू में शालिनी यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था, मगर बाद में उसने सीमा सुरक्षा बल के बर्खास्त जवान को अपना उम्मीदवार बना लिया था. यादव के नामांकन पत्र को खारिज करते हुए निर्वाचन अधिकारी ने कहा था कि नामांकन पत्र के साथ चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित स्वरूप में प्रमाण पत्र नहीं है कि उसे भ्रष्टाचार के लिए या राज्य के प्रति निष्ठाहीनता दिखाने के लिए बर्खास्त किया गया.