नई दिल्ली: सक्रिय राजनीत में एंट्री के बाद कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने 12 मार्च को गुजरात में पहली रैली को संबोधित किया. गांधी ने अपने 8 मिनट के भाषण में लोगों से जुड़े मुद्दों पर बात की और सरकार पर सीधा हमला बोला. उनके भाषण को लेकर कई तरह की बातें हुईं लेकिन प्रियंका के भाषण की एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात पर किसी ने गौर नहीं किया. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ‘मेरी बहनों और मेरे भाइयों’ के संबोधन से शुरू किया. ऐसा कर उन्होंने उस रूढ़िवाद को तोड़ने की कोशिश की जिसमें अक्सर पहले पुरुषों को संबोधित किया जाता है और मेरे भाइयों और बहनों बोला जाता है. Also Read - कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल राम मंदिर के लिए देंगे 21 हज़ार रुपए, कहा- धार्मिक हूं, कट्टरपंथी नहीं

गुरुवार को महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुस्मिता देव ने प्रिंयका गांधी के भाषण का वीडियो ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि प्रियंका गांधी ने मेरी बहनों और मेरे भाइयों संबोधित कर महिलाओं को वरियता दी. गुजरात में दिया गया प्रियंका गांधी का भाषण कई वजहों से खास है. उन्होंने जिस तरह से अपने भाषण में पहले महिलाओं को संबोधित किया उसने उस रूढ़िवादी को तोड़ने का काम किया जिसमे पहले पुरुषों को संबोधित किया जाता है. प्रियंका गांधी ने देव के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, … मैं सोचती हूं किसी ने नोटिस नहीं किया. Also Read - राहुल गांधी ने कहा- अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास नहीं रहा, PM मोदी में मुश्किल से निपटने की योग्यता नहीं

बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा ऐलान करते हुए बुधवार को कहा कि उसकी सरकार बनने पर केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा. पार्टी अध्यक्ष ने चेन्नई के एक कॉलेज में छात्राओं से संवाद के दौरान कहा कि अगर संप्रग सरकार बनती है तो महिला आरक्षण विधेयक पारित किया जाएगा और केंद्र व राज्य सरकारों में 33 फीसदी नौकरियां महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. Also Read - फिलहाल राहुल गांधी नहीं संभालेंगे पार्टी की कमान, सोनिया कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रह सकती हैं

राहुल गांधी की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवादाताओं से कहा कि राहुल जी ने जो घोषणा की है वो संवैधानिक दायरे में है और जरूरत पड़ने पर कानून भी बनाया जाएगा. गौरतलब है कि कांग्रेस लंबे समय से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने से जुड़े विधेयक को पारित करने की पैरवी करती रही है, लेकिन उसने पहली बार सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण का वादा किया है.