नई दिल्ली/पणजी. गोवा में मंगलवार देर रात बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ. महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (MGP) के दो विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. इसी के साथ लोकसभा चुनाव के ठीक पहले बीजेपी को राज्य में बड़ी सफलता मिली है. अब राज्य की 40 सदस्यी विधानसभा में बीजेपी के 14 विधायक हो गए हैं.

सुबह से ही राज्य में राजनीतिक घटनाक्रम एक के बाद एक बदलता दिख रहा था. इस बीच एमजीपी विधायक मनोहर अजगांवकर और दीपक पावसकर ने विधायक दल को बीजेपी में विलय को लेकर एक चिट्ठी लिखी. खास बात ये है कि इस चिट्ठी पर गोवा विधानसभा अध्यक्ष माइकल लोबो का जवाब रात 1:45 बजे आया और उन्होंने मंजूर दे दी. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एमजीपी के तीसरे विधायक सुदीन गवलकर ने चिट्ठी पर साइन नहीं किए.

दोनों हैं राज्य में मंत्री
बता दें कि धावलिकर और अजगांवकर पर्रिकर सरकार से ही राज्य में मंत्री हैं. अजगांवकर राज्य सरकार में जहां पर्यटन मंत्री हैं, वहीं धवलिकर डिप्टी सीएम हैं. तीन में से दो विधायकों के विलय के बाद भी दोनों विधायक दलबदल विरोधी कानून से बच जाएंगे. इसके पीछे तर्क ये है कि दलबदल कानून के मुताबिक, अगर दो तिहाई संख्या विलय के लिए सहमत हों तो यह लागू नहीं होता.

सबसे पुरानी पार्टी होने का दावा
पार्टी के विलय के बाद धवलीकर ने कहा कि उनकी पार्टी राज्‍य की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी है. कुछ लोग इसे आगे बढ़ना नहीं देना चाहते हैं. पार्टी के वरिष्‍ठ पदाधिकारी ममलतदार ने पिछले हफ्ते चिट्ठी लिखकर कहा था कि पार्टी के फैसलों को उनतक पहुंचाया जाए.