नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने मायावती को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मायावती जब भी मुश्किल में हों, वह मुझे कॉल करें. मैं उन्हें मुश्किल से बचाऊंगी क्योंकि समाजवादी पार्टी के लोग उन पर हमला जरूर करेंगे.

उमा भारती ने ये बात गेस्ट हाउस कांड को याद करते हुए कही है. उमा भारती ने कहा कि ‘जब रेस्ट हाउस में उन पर (मायावती पर) हमला हुआ था तब ब्रह्मदत्त द्विवेदी जी थे. अब वो नहीं हैं तो मैं हूं अब. जैसे ही उनको संकट आये तो मेरा मोबाइल नंबर रखें और तुरंत मुझे फोन करें. सपा के लोग उन पर हमला करेंगे जरूर.’ मायावती ने सपा के साथ लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में गठबंधन किया है. गठबंधन के बीच मायावती को अक्सर गेस्ट हाउस कांड याद दिलाया जाता है. 1995 में मायावती पर हमला किया गया था.

बीजेपी नेता साक्षी महाराज ने कहा- इस चुनाव के बाद 2024 में नहीं होंगे लोकसभा चुनाव

ये था गेस्ट हाउस कांड
2 जून, 1995 के इस कांड को न सिर्फ मायावती बल्कि इसके गवाह रहे नेता भी अक्सर याद करते हैं. बसपा से तीन बार विधायक व कैबिनेट मंत्री रहे धूराम चौधरी भी इस घटना के गवाह रहे हैं. धूराम चौधरी गेस्ट हाउस कांड को सबसे दुर्दांत और राजनीति के लिए काला दिन मानते हैं. वह कहते हैं- उस घटना के बाद सपा-बसपा और दो वर्गों के बीच खाई चौड़ी हो गई थी. धूराम चौधरी बताते हैं कि 1993 में बसपा के समर्थन से सपा ने सरकार बनाई थी. बसपा ने समर्थन वापस लिया तो सपा सरकार गिर गई. सपा सरकार गिरने के बाद मायावती मीराबाई गेस्ट हाउस के कॉमन हॉल में विधायकों के साथ मीटिंग कर रही थीं. इसी बीच कुछ प्रेस के लोग आ गए. मायावती ने हमसे कहा कि पहले प्रेस से बात कर लें फिर बात करते हैं. वो अपने सुइट नंबर एक में चली गईं.

वो खतरनाक दिन, जिसे सपा से दोस्ती के बाद भी नहीं भूलीं मायावती, आज फिर बार-बार किया ज़िक्र

मायावती जहां थीं, वहीं हुआ था हमला

धूराम कहते हैं कि इसके बाद जो घटित हुआ वह इतिहास में काले दिन के रूप में है. 2 जून, 1995 को दोपहर के करीब ढाई बजे थे. इसी बीच समाजवादी पार्टी से जुड़े चार-पांच सौ लोग आ धमके. वहां 40-45 बसपा विधायक थे. इन सब हमला बोल दिया. अचानक हमला बोला गया. कोई कुछ समझ नहीं पाया. भीड़ गालियां दे रही थी. मारपीट की जाने लगी. भीड़ ने कई विधायकों को गाड़ी में डाल लिया. घसीटते हुए गाड़ी में डाला गया. 22 लोग काफी देर तक सपाइयों के कब्ज़े में बने रहे. ‘मारो-मारो, पकड़ो-पकड़ो’ की आवाजें आ रही थीं. बसपा के विधायकों को जूतों से पीटा गया.

इस तरह पानी पर टूट पड़े थे
धूराम बताते हैं कि घटना की रात में हम सुइट नम्बर 1 में ही बंद बने रहे. दो कमरों में हम लोग बैठे रहे. सभी बुरी तरह से डर गये थे. पूरी रात सोये नहीं. फिर भी मुश्किल ख़त्म नहीं हुई. जहां ठहरे थे. वहां का पानी बंद कर दिया गया. बिजली कनेक्शन भी हटा दिया गया. टेलीफोन भी कट गया. हम सब कई घंटों से प्यासे थे. रात के एक बजे सेंट्रल रिज़र्व फोर्स लगा. तब हमें पीने के लिए एक बाल्टी पानी मिला. पानी पर बुरी तरह से टूट पड़े थे. इसके बाद हमें अलग-अलग कमरों में शिफ्ट किया गया. इस तरह वह दिन गुजरा था. मायावती ने इससे नाराज होते हुए अगले ही दिन बीजेपी से गठबंधन कर लिया था. और फिर से सीएम बनीं.