नई दिल्ली: सेना के आठ पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों द्वारा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के लिए कथित रूप से लिखे गए पत्र को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है. जिन पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा पत्र लिखे जाने की बात कही जा रही थी, उन्होंने ही मना कर दिया है कि उन्होंने कोई पत्र ही राष्ट्रपति के लिए नहीं लिखा है. पूर्व सैनिकों ने कहा कि सेना के लोकसभा चुनाव 2019 में राजनीतिक इस्तेमाल से जुड़ी चिट्ठी राष्ट्रपति को नहीं लिखी है. बता दें कि खबर के मुताबिक एक चिट्ठी में सेना के 8 पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया है.

पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी शामिल हैं. हालांकि पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज ने इस तरह के किसी पत्र से इंकार किया है. उन्होंने कहा, ‘सर्विस के दौरान हम जो भी सरकार होती है उसका ऑर्डर फोलो करते है, सेना का राजनीति से कोई लेना देना नहीं होता है, कोई कुछ भी कह सकता है और उसे फेक न्यूज बनाकर बेच सकता है. मैं नहीं जानता कि वो कौन लोग हैं जिन्होंने यह सब लिखा है.’

इस पत्र को लेकर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि फर्जी तरीके से पत्र लिखा जाना वाकई निंदनीय है. यहां तक कि राष्ट्रपति भवन को भी ये पत्र नहीं मिला है, जबकि ये मीडिया में है. बता दें कि खबर आई थी कि सेना के आठ पूर्व प्रमुखों और 148 अन्य पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर आक्रोश जताया है. पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी शामिल थे. तीन पूर्व नौसेना प्रमुखों एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, एडमिरल (सेवानिवृत्त) अरुण प्रकाश, एडमिरल (सेवानिवृत्त) मेहता और एडमिरल (सेवानिवृत्त) विष्णु भागवत ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. पत्र बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति के पास भेजा गया था.

इस पत्र के अनुसार पूर्व सैनिकों ने लिखा था, ‘महोदय हम नेताओं की असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकृत प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं जिसमें वह सीमा पार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं और यहां तक कि सशस्त्र सेनाओं को ‘मोदी जी की सेना’ बताने का दावा तक कर रहे हैं.’’ पत्र में कहा गया था कि यह चिंता और सेवारत तथा सेवानिवृत्त सैनिकों के बीच असंतोष का मामला है कि सशस्त्र सेनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए किया जा रहा है.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक चुनावी रैली में सशस्त्र सेनाओं को ‘‘मोदीजी की सेना’’ बताया जिसपर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. निर्वाचन आयोग ने भी टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई. पत्र में पूर्व सैनिकों ने चुनाव प्रचार अभियानों में भारतीय वायु सेना के पायलट अभिनंदन वर्धमान और अन्य सैनिकों की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी नाखुशी जताई.