चेन्नई: आजकल चुनाव में बेहद अहम् और स्थानीय समस्याएं हावी नहीं रहती हैं. प्रदूषण जैसे मुद्दों की तो बात ही नहीं होती, लेकिन तमिलनाडु तिरुवल्लुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के एक गांव के लोगों ने जो किया, वह अपने आप में मिसाल है. ग्रामीणों ने कुछ और सुख सुविधाओं वाली समस्याओं के लिए बल्कि प्रदूषण जैसे मुद्दे के लिए मतदान ही नहीं किया है.

तमिलनाडु के तिरुवल्लुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के नागराजा कंदिगाई गांव के करीब 500 मतदाताओं ने अपने क्षेत्र में स्पॉन्ज आयरन के एक कारखाने से फैल रहे प्रदूषण के विरोध में चुनाव का बहिष्कार किया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. पोन्नेरी के राजस्व विभाग अधिकारी नंदकुमार ने बताया, “हमने कंपनी को कारखाना बंद करने के लिए कहा है. ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए मनाने की कोशिश की जा रही है.” ग्रामीण चेन्नई फेरस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ हैं. अधिकारियों के अनुसार, नागराजा कंदिगाई गांव के लोगों के लिए स्थापित मतदान केंद्र में एक भी वोट नहीं पड़ा है.

भारत में वायु प्रदूषण हुआ और खतरनाक, 1 साल में 12 लाख लोगों की हुई मौत

इसी तरह बिहार के कटिहार लोकसभा सीट के दो गाँवों में लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया है. मनिहारी के गांधीटोला के बूथ 139 और 140 पर वोट बहिष्कार किया गया है. गाँव के लोगों की मांग है कि गंगा कटाव का स्थायी निदान नहीं किया गया, हमेशा आश्वासन मिलता रहा, लेकिन आज तक कटाव रोकने के लिए कोई कार्य नहीं हुआ है. मनिहारी सीओ संजीव कुमार मतदाताओं को समझाने पहुंचे, लेकिन लोग नहीं माने.

भारत में बीते साल करीब 12 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई है. वायु प्रदूषण पर आई एक वैश्विक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019 के मुताबिक लंबे समय तक घर से बाहर रहने या घर में वायु प्रदूषण की वजह से 2017 में स्ट्रोक, मधुमेह, दिल का दौरा, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े की पुरानी बीमारियों से करीब पूरी दुनिया में करीब 50 लाख लोगों की मौत हुई.

रिपोर्ट में बताया गया है, इनमें से तीस लाख मौतें सीधे तौर पर पीएम2.5 से जुड़ीं हैं. इनमें से करीब आधे लोगों की मौत भारत व चीन में हुई है. साल 2017 में इन दोनों देशों में 12-12 लाख लोगों की मौत इस वजह से हुई. अमेरिका की हेल्थ इफैक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) ने यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की. इसमें बताया गया है कि भारत में स्वास्थ्य संबंधी खतरों से होने वाली मौतों का तीसरा सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण और इसके बाद धूम्रपान है.