नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से नामांकन करेंगे. इससे पहले गुरुवार को वह शहर में एक रोड शो करने वाले हैं. इसे लेकर पिछले कई दिनों से तैयारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी का वाराणसी में रोड शो और अगले दिन वहां से नामांकन चौथे चरण से लेकर 7वें चरण तक के चुनाव को प्रभावित करेगा. इसके पीछे एक बड़ा कारण मोदी के नामांकन में एनडीए के सभी बड़े घटक दल के नेताओं के शामिल होना भी है.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार की शाम को वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी के नामांकन में जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार, शिरोमणी अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान सहित दक्षिण से लेकर पूर्वोत्तर तक के नेता शामिल होंगे. इससे पहले ये नेता गुजरात के गांधीनगर में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नामांकन में भी दिखे थे.

एनडीए के नेताओं का असर
बता दें कि एनडीए के घटक नेताओं के मोदी के नामांकन में शामिल होने से एक संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि एनडीए में शामिल सभी पार्टियां एक साथ खड़ी हैं और सबका चेहरा पीएम मोदी हैं. इस चुनाव में ये देखने को मिल रहा है कि साल 2014 की तरह ही इस बार भी चुनाव के केंद्र मोदी ही हैं. एक बड़ा वर्ग मोदी के नाम पर वोट देने की सोच रहा है, या दे चुका है. ऐसे में एनडीए के घटक दल भी मोदी की उस लोकप्रियता का फायदा उठाने चाहेंगे. वहीं, बीजेपी को भी इन नेताओं के कोर वोट बैंक का असर अलग-अलग सीटों पर मिल सकता है.

एनडीए के नेताओं को किस तरह होगा फायदा
तीन चरणों में 543 में से 300 सीटों पर चुनाव हो चुके हैं. अब चुनाव उन बड़े राज्यों की तरफ मुड़ चुका है जो पॉलिटिकली ज्यादा वोकल होते हैं. इसमें यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा से लेकर पूर्वोत्तर की कई प्रमुख सीटों पर चुनाव हैं. साल 2014 में इन सीटों पर एनडीए को बड़ी सफलता मिली थी. ऐसे में एनडीए में शामिल सभी पार्टियां नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का फायदा उठाने की कोशिश करेंगी. इनके नेता पीएम मोदी के नामांकन में मौजूद रहेंगे तो इनके राज्यों में भी एक मैसेज जाएगा, जिसका इनके पक्ष में वोटर्स पर असर पड़ेगा.

बीजेपी को किस तरह का होगा फायदा
यूपी और बिहार में जिस तरह से महागठबंधन बना है, उससे विपक्ष बहुत हद तक एक जातीय संतुलन बनाने में कामयाब हो गया है. इसकी काट में बीजेपी राष्ट्रवाद को लेकर आई है और उसमें नरेंद्र मोदी की शख्सियत भी है. लेकिन इन सबमें वह किसी तरह की कमी नहीं रखना चाहती है. ऐसे में नीतीश, पासवान, बादल, ठाकरे जैसे लोगों को शामिल करके बीजेपी एक बड़े वोट बैंक और जातीय समीकरण को साधने की कोशिश करती दिख रही हैं.