Amethi Lok Sabha Seat Result : लोकसभा चुनावों में गांधी परिवार के लिए सबसे सुरक्षित सीटों में से एक अमेठी (Amethi) ने इस बार चौंकाने वाला परिणाम दिया. इस सीट से कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को हार का मुंह देखना पड़ा है. बीजेपी प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने राहुल गांधी को 55 हजार वोटों के अंतर से पराजित कर दिया.इस चुनाव में स्मृति ईरानी को 4 लाख 67 हजार 598 मत मिले, जबकि राहुल गांधी को 4 लाख 12 हजार 867 मत प्राप्त हुए. इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को 1,07,000 वोटों के अंतर से हराया था. राहुल गांधी अमेठी से लगातार तीन बार सांसद रहे. उन्होंने 2009 में यह सीट 3,50,000 से भी ज्यादा मतों से जीती थी. राहुल गांधी यहां से पहली बार 2004 में चुनकर संसद पहुंचे थे.

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दरअसल, अमेठी संसदीय सीट को कांग्रेस का दुर्ग कहा जाता रहा है और इस सीट पर इससे पहले तक जो 16 लोकसभा चुनाव और 2 उपचुनाव हुए, उनमें से कांग्रेस ने यहां 16 बार जीत दर्ज की. 1977 में लोकदल और 1998 में भाजपा को यहां से जीत मिली थी, जबकि बसपा और सपा इस सीट से अभी तक अपना खाता भी नहीं खोल सकी है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi)  ने राजनीति में जब कदम रखा तो उन्होंने 1999 में अमेठी को ही अपनी कर्मभूमि बनाया था. वह इस सीट से जीतकर पहली बार सांसद बनी, लेकिन 2004 के चुनाव में उन्होंने अपने बेटे राहुल गांधी के लिए ये सीट छोड़ दी और इसके बाद से राहुल ने लगातार तीन बार यहां से जीत हासिल की.

अमेठी लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें अमेठी जिले की तिलोई, जगदीशपुर, अमेठी और गौरीगंज शामिल है, जबिक रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट आती है. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में 5 सीटों में से 4 सीटों पर भाजपा और महज एक सीट पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी.

राहुल गांधी की हार की बड़ी वजह!

स्मृति ईरानी की जीत के पीछे अमेठी की जनता का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिल सकी, जो उनके दिवंगत पिता एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) से मिलती थी. अमेठी के लोगों का कहना है कि राजीव गांधी के समय शुरू की गई कई परियोजनाएं और कार्यक्रम राहुल के सांसद रहते एक-एक कर बंद हो गए, जिससे हजारों लोगों की रोजी-रोजगार पर असर पड़ा. इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने रोजगार के लिए अमेठी से पलायन किया. उनका कहना है कि और तो और गांधी परिवार से बरसों से पूरी निष्ठा से जुड़े बुजुर्गों का भी मन टूटा दिखता है. उन्हें मलाल है कि गांधी परिवार की वर्तमान पीढ़ी से उन्हें वह प्यार और इज्जत नहीं मिली, जो इसे पहले की पीढ़ियों से मिला करती थी.

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रिटायर्ड टीचर सुनील सिंह ने कहा, ‘राजीव गांधी जीवन रेखा एक्सप्रेस साल में एक बार महीने भर के लिए अमेठी आती थी. इस ट्रेन पर डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम होती थी, जो इलाज के साथ-साथ सर्जरी भी करती थी. इस सेवा से लाखों लोगों को फायदा हुआ, लेकिन यह सेवा राहुल के सांसद रहते बंद हो गई. इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा को बहाल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया.’

सुनील सिंह की बात से सहमति जताते हुए किराना व्यापारी शशांक साहू ने बताया, ‘राजीव गांधी ने सम्राट बाइसिकिल्स नामक कंपनी स्थापित करने में मदद की थी. फैक्टरी घाटे में चली गई और उसे बंद कर दिया गया. उसके बाद कंपनी की जमीन नीलामी पर लग गई, क्योंकि कंपनी पर कर्ज था. जमीन को राजीव गांधी चैरिटेबिल ट्रस्ट ने खरीद लिया.’

उन्होंने कहा, ‘ट्रस्ट में राहुल गांधी ट्रस्टी हैं और किसानों को जमीन लौटाने की मांग को लेकर स्मृति ईरानी ने पांच साल तक लड़ाई लड़ी. स्मृति के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय लोगों से किसानों की जमीन वापस लौटाने का वादा किया है.’

आंगनबाड़ी सेविका उषा तिवारी ने बताया कि राजीव गांधी सचल स्वास्थ्य सेवा के तहत नौ गाड़ियां गांव-गांव जाकर गरीबों का इलाज करती थी और मुफ्त में दवा बांटती थी, लेकिन यह सेवा भी राहुल के सांसद रहते ही बंद हो गई और जनता की भारी मांग के बावजूद इसे दोबारा शुरू कराने का प्रयास नहीं किया गया.

बुजुर्ग शम्शुद्दीन ने बताया, ‘राजीव गांधी गांव-गांव, घर-घर जाकर एक-एक व्यक्ति से व्यक्तिगत तौर पर मिलते थे और इससे उनका अमेठी की जनता के साथ आत्मीय संबंध कायम हो गया था. राहुल ने अमेठी के दौरे तो बहुत किए, लेकिन कहीं न कहीं लोगों के साथ वह सीधा संवाद नहीं स्थापित कर पाए, जो राजीव गांधी के साथ होता था.’

उन्होंने कहा, ‘राजीव गांधी के समय के पुराने और निष्ठावान कांग्रेसी धीरे-धीरे पार्टी से दूर होते चले गए, जबकि सच्चाई यह है कि ये लोग ही पार्टी के चुनाव अभियान की पूरी कमान संभालते थे. अगर ये लोग साथ होते तो शायद नतीजे राहुल के पक्ष में नजर आते.’

इस संसदीय क्षेत्र के गौरीगंज सब्जी मंडी में सब्जी का थोक कारोबार करने वाले धनंजय कुमार मौर्य ने बताया, ‘अमेठी से सांसद रह चुके कैप्टन सतीश शर्मा के समय बनी मालविका स्टील फैक्टरी भी राहुल के ही समय में बंद हो गई. किसानों की जो जमीन गई, वह तो गई ही, साथ ही 10 हजार लोग बेरोजगार हो गए. ये वही बेरोजगार थे, जिन्हें किसानों से जमीन के बदले एक परिवार से एक व्यक्ति को फैक्टरी में रोजगार के लिए रखा गया था .’

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