नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को निर्देश दिया कि राफेल मामले में फैसले के बारे में मीडिया में की गई अपनी टिप्पणियां गलत तरीके से शीर्ष अदालत से जोड़े जाने के संबंध में वह 22 अप्रैल तक स्पष्टीकरण दें. उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश पर कांग्रेस ने कहा कि वह न्यायालय को सफाई देगी, जबकि भाजपा ने कहा कि शीर्ष अदालत ने गांधी के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है. शीर्ष अदालत ने भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की याचिका पर निर्देश दिया, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है. लेखी ने दावा किया कि राहुल गांधी ने कुछ टिप्पणियां गलत तरीके से सुप्रीम कोर्ट से जोड़ दीं, जो 10 अप्रैल को राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में नहीं थीं. अदालत ने लेखी की आपराधिक अवमानना याचिका पर विचार करना स्वीकार किया और साफ किया कि गांधी द्वारा सार्वजनिक रूप से टिप्पणियों को गलत तरीके से इस अदालत से जोड़ा गया है.

नई दिल्ली से लोकसभा सदस्य लेखी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि गांधी ने अपनी निजी टिप्पणियों को गलत तरीके से शीर्ष अदालत का बता दिया. लेखी की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि गांधी ने पूरी तरह अवमानना की है. कांग्रेस अध्यक्ष ने 10 अप्रैल को दावा किया था कि शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चोरी की है. उन्होंने अमेठी में नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही.

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वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष पर राजनीतिक दुष्प्रचार के लिए राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार झूठ बोलने का अधिकार नहीं है. जेटली ने इस पर ट्वीट किया, भारतीय लोकतंत्र उन्हें अनुमति नहीं देता है कि अदालत के आदेश को फिर से लिखें. राजनीतिक दुष्प्रचार के लिए अदालत के आदेश को तोड़-मरोड़ कर राहुल गांधी और गर्त में पहुंच गए हैं. वह जितना नीचे जाएंगे, हम उतना ही ऊपर उठेंगे.

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, हम यह स्पष्ट करते हैं कि राहुल गांधी द्वारा इस न्यायालय के नाम से मीडिया और जनता में जिस राय, मत अथवा निष्कर्ष का जिक्र अपनी टिप्पणी में किया, उन्हें गलत तरीके से इस न्यायालय का बताया गया है. हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि इस तरह की टिप्पणी करने का कोई अवसर नहीं था, क्योंकि वह चुनिन्दा दस्तावेजों की कानूनी स्वीकार्यता के पहलू पर फैसला कर रहे थे, जिन पर अटार्नी जनरल ने आपत्ति की थी.

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पीठ ने कहा, इस मसले को स्पष्ट करने के बाद हम उचित समझते हैं कि गांधी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाए. पीठ ने कहा कि गांधी का स्पष्टीकरण अगले सोमवार को या उससे पहले दाखिल करना होगा और मामले में सुनवाई 23 अप्रैल को होगी.

बता दें कि शीर्ष अदालत ने 10 अप्रैल को कहा था कि वह कुछ लीकदस्तावेजों के आधार पर एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगी. उसने इन दस्तावेजों पर विशेषाधिकार होने संबंधी सरकार की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया.