Lok Sabha Election 2019 Result: पिछले कुछ दशक से जाति आधारित राजनीति की पहचान रखने वाले बिहार में 2019 के लोकसभा चुनाव में जनमत करवट बदलती दिख रही है. यादव-मुसलमान, कुर्मी-कोइरी-अन्य पिछड़ा वर्ग और अगड़ी जातियों के बीच स्पष्ट तौर पर बंटी राजनीति इस बार के चुनाव में कमजोर पड़ती दिख रही है. राज्य में लोकसभा की 40 सीटें हैं, लेकिन इस बार राज्य की प्रमुख पार्टी राजद खाता नहीं खोल पाई है. राजद को मुख्य रूप से यादवों व मुसलमानों की पार्टी माना जाता है. दूसरी तरफ भाजपा और उसकी सहयोगी जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले 5 यादव सांसद चुने गए हैं.

इससे पता चलता है कि अब वो जमान बीत गया है जब लालू प्रसाद यादव को यादव समुदाय का एकछत्र नेता कहा जाता था. राज्य में यादव समुदाय की आबादी करीब 15 फीसदी है. तीन दशक से ज्यादा समय से माना जाता रहा है कि यह समुदाय एकजूट होकर राजद के लिए वोट करता है. इस बार एनडीए की ओर से मैदान में उतारे गए पांचों के पांचों यादव उम्मीदवार जीत गए हैं. ये उन सीटों से जीते हैं जहां यादव वोटर बहुसंख्यक हैं. इनता ही नहीं इनमें से अधिकतर की जीत 2 लाख से अधिक वोटों से हुई है. ऐसे में कहा जा सकता है कि अब वो दौर खत्म हो रहा है जब यादवों के लालू एकछत्र नेता हुआ करते थे.

उत्तरी बिहार में उजियारपुर सीट से भाजपा के प्रदेशाध्य नित्यानंद राय चुनाव जीते हैं. उन्हें भाजपा में यादवों का चेहरा माना जाता है. वह 2.77 लाखों वोटों से जीते हैं. 2014 के चुनाव में भी उन्होंने शानदार जीत हासिल की थी. मधेपुरा से पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव 3 लाख से अधिक वोटों से चुनाव हार गए हैं. उन्हें जदयू के उम्मीद दिनेश चंद्र यादव ने हराया है. मधेपुरा बिहार का संभवतः सबसे ज्यादा यादव बहुल क्षेत्र है. इसी तरह से पटना साहिब सीट पर लालू यादव की बेटी मीसा भारती को हार का सामना करना पड़ा है. वहां से कभी लालू के हनुमान कहे जाने वाले रामकृपाल यादव ने जीत हासिल की है. उन्होंने 39 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की है.

बांका से जदयू के गिरिधारी यादव ने राजद के जयप्रकाश नारायण यादव को 2 लाख से अधिक वोटों से हराया है. मधुबनी से भाजपा के उम्मीदवार अशोक कुमार यादव ने वीआईपी पार्टी के वद्री कुमार पुर्वे को 4.50 लाख से अधिक वोटों से हराया है.