छतरपुर: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि गठबंधन के मुद्दे पर छोटे दलों को साथ लेने की जिम्‍मेदारी कांग्रेस की है. उन्‍होंने यह भी जोड़ा कि उनकी पार्टी छत्‍तीसगढ़ में गठबंधन कर चुकी है जबकि मध्‍यप्रदेश में बातचीत चल रही है. तीन दिन पहले बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा कांग्रेस की आलोचना के बाद अखिलेश ने भी स्‍पष्‍ट कर दिया कि राष्‍ट्रीय स्‍तर पर महागठबंधन बनाने की कोशिश में लगी मुख्‍य विपक्षी पार्टी के लिए राह आसान नहीं होने वाली है.

खजुराहो में मंगलवार को पत्रकार वार्ता में गठबंधन के सवाल पर अखिलेश ने स्पष्ट किया, ‘‘कांग्रेस एक बड़ा दल है और इस नाते उसकी जिम्मेदारी बनती है. एक समय था जब समाजवादी पार्टी के आठ विधायक मध्यप्रदेश में थे, हमारा मत प्रतिशत भी ठीक था. हम तो चाहते थे कि कांग्रेस के साथ गठबंधन हो, पर कांग्रेस को लगता है कि हममें बल नहीं है. अब गठबंधन की बात तो सिर्फ हमसे नहीं बल्कि बसपा के साथ भी करनी होगी, तभी गठबंधन हो पायेगा.’’ उन्होंने कहा कि हमारा गठबंधन छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हो चुका है और बसपा से बात चल रही है.

गुजरात में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हो रही घटनाओं पर उन्होंने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उत्तर भारत के लोगों को वहां से निकाला जाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि ये तो नहीं हो सकता कि एक घटना का सहारा लेकर आप सबको मार कर भगा दें.

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सपा अध्यक्ष ने ‘भाजपा हटाइये, सुख चैन से रहिये’ का नारा देते हुए कहा कि भाजपा को हटा दो, समाज में प्यार-मोहब्बत होगा. भाजपा तो प्रयोग करती है कि लोग दुखी कैसे हों. रात में नोटबंदी कर दी, देश लाइन में खड़ा हो गया. जीएसटी लागू कर दी तो व्यापारी परेशान हो गया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले आये तो उसमें भी कुछ करने लगे. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है. उन्‍होंने शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर विकास की अनदेखी करने और भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया.

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तीन दिन पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने के फैसले का ऐलान किया था. मायावती ने कांग्रेस पर जोरदार हमला करते हुए कहा था कि मुख्‍य विपक्षी पार्टी भाजपा की बजाय बसपा को ही खत्‍म करना चाहती है. उन्‍होंने मध्‍यप्रदेश के कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर बीजेपी एजेंट होने का आरोप भी लगाया था.

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अखिलेश ने हालांकि कांग्रेस की सीधे आलोचना तो नहीं की है, लेकिन अप्रत्‍यक्ष रूप से बता दिया कि मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन नहीं होने के लिए वही जिम्‍मेदार है. साथ ही, सपा के साथ बसपा का नाम जोड़कर यह भी बता दिया कि भविष्‍य में भी गठबंधन के लिए कांग्रेस को इन दोनों पार्टियों को एक साथ साधना पड़ेगा.