पटना: बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला आवंटन करने के प्रदेश सरकार का आदेश मंगलवार को पटना उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया. पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए.पी. साही और न्यायमूर्ति अंजना मिश्र की खंडपीठ ने बिहार सरकार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला आवंटित किए जाने वाले नियम को असंवैधानिक करार देते हुए इसे कड़ी मेहनत से अर्जित सार्वजनिक धन का दुरुपयोग बताया. Also Read - Bihar Assembly Election 2020 : 'बाबू साहब' के बयान पर घिरे तेजस्वी यादव ने दी सफाई, बोले- बड़का बाबू, छोटका बाबू कौन है

अदालत ने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के पद से मुक्त होने के बाद जीवन भर के लिए बंगला प्रदान करने जैसी सुविधा प्रदान करना पूरी तरह से गलत है. पटना हाईकोर्ट के इस फैसले से पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, जगन्नाथ मिश्रा, सतीश प्रसाद सिंह और जीतन राम मांझी प्रभावित हो सकते हैं. Also Read - जश्‍न में फायरिंग: लोक गायक व एक्‍टर गोलू राजा को सीने में लगी गोली, BJP नेता पर केस दर्ज

खंडपीठ ने गत 7 जनवरी को बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की अपील की सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित बंगले पर स्वत: संज्ञान लिया था. यादव ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें प्रदेश की पिछली महागठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें मिले 5 देशरत्न मार्ग बंगले का आवंटन बरकार रखने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. Also Read - बिहार: मूर्ति विसर्जन के दौरान लोगों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प, 1 की मौत 10 से ज्यादा घायल

खंडपीठ ने बिहार सरकार और जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला आवंटित किया गया है, उनसे जवाब मांगा था कि सुप्रीम कोर्ट के लोक प्रहरी मामले में फैसले के आलोक में राज्य सरकार द्वारा 2010 में बिहार स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (संशोधन) अधिनियम को क्यों नहीं रद्द किया गया. इस अधिनियम के तहत बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए जीवन भर के लिए बंगला के आवंटन का प्रावधान किया गया था.