इंदौर: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) भाजपा शासित मध्यप्रदेश में अगले स्थानीय निकाय चुनावों से अपने चुनावी सफर का आगाज कर सकती है. सूबे के कई शहरों और कस्बों में ये चुनाव वर्ष 2021 की शुरुआत में संभावित हैं. ऐसे में सवाल है कि क्‍या मध्‍य प्रदेश की दो दलों बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंटी सियासी जमीन में ओवैसी की AIMIM कोई सेंध लगा पाएगी. अवैसी के पार्टी के मध्‍य प्रदेश में कूदने से क्‍या बीजेपी को फायदा होगा या कांग्रेस को नुकसान. इसका गणित भी सियासी पंडित लगा रहे हैं. Also Read - Ayodhya Ram Temple: राम मंदिर निर्माण के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एक लाख रुपये का दिया दान

बता दें कि महाराष्‍ट्र, के बाद बिहार के विधानसभा चुनावों में मिली सफलता से ओवैसी देश में मुस्लिमों का बड़ा चेहरा बनने की तैयारी में हैं. वह पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. बता दें कि हाल ही में ग्रेटर हैदरबाद म्‍युनिसपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में AIMIM और टीआरएस के गठबंधन के खिलाफ बीजेपी ने काफी आक्रमक चुनाव लड़ा था. इसके बाद ओवैसी मध्‍य प्रदेश की सियासत में भी कूदने की तैयारी में नजर आ रहे हैं. Also Read - West Bengal Assembly Election: कांग्रेस का ममता बनर्जी को बड़ा ऑफर, कहा- पश्चिम बंगाल में मिलकर चुनाव लड़े TMC, बीजेपी से...

AIMIM (एआईएमआईएम) की राज्य इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. नईम अंसारी ने बुधवार को बताया, “हम अगले स्थानीय निकाय चुनावों में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, खंडवा, सागर, बुरहानपुर, खरगोन, रतलाम, जावरा, जबलपुर, बालाघाट, मंदसौर और कुछ अन्य स्थानों से मैदान में उतरने की संभावनाएं तलाश रहे हैं.” Also Read - TMC सांसद नुसरत जहां ने भाजपा को बताया दंगा कराने वाला, मुसलमानों को कहा- उल्टी गिनती शुरू..

अंसारी ने बताया कि एआईएमआईएम के प्रदेश प्रभारी और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) के तीन बार के पार्षद सैयद मिन्हाजुद्दीन के मार्गदर्शन में इन इलाकों में पार्टी का अंदरूनी सर्वेक्षण किया जा रहा है. उन्होंने बताया, “सर्वेक्षण की रिपोर्ट की रोशनी में एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी सूबे में पार्टी द्वारा अगले स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के बारे में फैसला करेंगे.”

बता दें पिछले दिनों सुर्खियों में रहे जीएचएमसी चुनाव में भाजपा ने ओवैसी की पार्टी को उसके गढ़ में चुनौती दी थी.

ऐसे में तेलंगाना के बाद अब मध्यप्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में भी दोनों दलों के बीच टक्कर देखने को मिल सकती है.
बहरहाल, मध्यप्रदेश की सियासत पारंपरिक रूप से दो ध्रुवीय रही है और गुजरे बरसों में सत्ता की बागडोर भाजपा या कांग्रेस के हाथों में ही रही है. ऐसे में एआईएमआईएम सरीखी नई राजनीतिक ताकत के लिए राज्य में कितनी चुनावी गुंजाइश है, यह पूछे जाने पर अंसारी ने कहा, “जातिवादी राजनीति और खासकर शिक्षा तथा स्वास्थ्य के बुनियादी क्षेत्रों में गिरावट से सूबे के ज्यादातर लोग भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों की सरकारों से तंग आ चुके हैं. वे तीसरा विकल्प ढूंढ़ रहे हैं.”

AIMIM की मध्‍य प्रदेश इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. नईम अंसारी बताया, “एआईएमआईएम ने वर्ष 2015 से मध्यप्रदेश में अपना काम-काज शुरू किया था. हमने अब तक राज्य में कोई भी चुनाव नहीं लड़ा है.”

अंसारी ने यह भी बताया कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राज्य में एआईएमआईएम का विस्तार किया जा रहा है.

एआईएमआईएम के एक नेता ने बताया कि इन चुनावों से पहले पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए राज्य में कार्यक्रमों के लिए ओवैसी को बुलाने की कोशिश भी की जा रही है.