नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में जारी सियासी घमासान के बीच राज्य विधानसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे शुरू हो गई. मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी पार्टी के तमाम विधायक सदन पहुंच गए. वहीं दूसरी तरह भाजपा ने भी बीते रात ही अपने सभी विधायकों को गुरुग्राम से भोपाल पहुंचा दिया था. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ सदन पहुंच गए हैं. अब सबकी निगाहें विधानसभा अध्यक्ष पर टिकी है. राज्य के राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देश के मुताबिक आज कमलनाथ सरकार को सदन में बहुमत साबित करना है. लेकिन इसको लेकर सस्पेंस बरकरार है, क्योंकि कांग्रेस के बागी विधायकों का अभी तक कोई अतापता नहीं है. Also Read - मध्य प्रदेश में 'टोटल लॉकडाउन' के बाद लागू हुआ 'एस्मा', शिवराज सिंह चौहान ने दी जानकारी

इससे पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने आवास से निकलते समय ‘वी’ साइन दिखाते हुए सदन के लिए निकले. राज्य सरकार के मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीतू पटवारी ने दावा किया है कि उनकी सरकार बहुमत साबित करेगी. वहीं दूसरी ओर भाजपा के नेता लगातार कह रहे हैं कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है और उसे इस्तीफा दे देना चाहिए.

वहीं कमलनाथ ने रविवार देर रात राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की. राजभवन से देर रात करीब 12 बज कर 20 मिनट पर बाहर आते हुए कमलनाथ ने संवाददाताओं से कहा कि राज्यपाल ने उन्हें चर्चा के लिए बुलाया था. उन्होंने कहा, ‘‘राज्यपाल ने मुझसे कहा कि विधानसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित की जाए. इसलिए मैंने उनसे कहा कि मैं सोमवार सुबह इस बारे में स्पीकर से बात करूंगा.’’

राज्यपाल के निर्देशानुसार सदन में शक्ति परीक्षण सोमवार को कराये जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में स्पीकर कोई फैसला लेंगे. उन्होंने बताया कि वह पहले ही राज्यपाल को लिखित में दे चुके हैं कि उनकी सरकार सदन में शक्ति परीक्षण के लिए तैयार है. लेकिन ‘बंधक’ बनाये गये विधायकों को पहले छोड़ा जाना चाहिए. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उसके 22 विधायकों को भाजपा ने बंधक बना कर रखा है. इन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. स्पीकर एन पी प्रजापति ने इनमें से छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.