भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल में विस्तार किया. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 28 मंत्रियों के नामों पर अंतिम मुहर लगाई, जिन्हें यहां शपथ दिलाई गई. दिग्विजय सिंह के बेटे को मंत्री बनाया गया है. वहीं, मध्य प्रदेश की राजनीति में 15 साल बाद ऐसा हुआ है जब किसी मुस्लिम को मंत्रीमंडल में जगह मिली है. पांचवीं बार विधायक चुने गए आरिफ अकील को कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने मंत्री मंडल में जगह दी है.

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कद्दावर नेता हैं आरिफ अकील
आरिफ अकील के राजनैतिक करियर की शुरुआत छात्र नेता के रूप में हुई थी. वह एलएलबी के छात्र रहे हैं. वह कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़े रहे. उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने का सोचा, लेकिन कांग्रेस से टिकट नहीं मिला. फिर भी वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही चुनाव लड़ने उतर गए. उन्होंने कांग्रेस के ही उम्मीदवार को हरा दिया. ये बात 1990 की है. तब से लेकर अब आरिफ अकील ने जितने भी चुनाव लड़े, लगभग सभी में जीत हासिल की. वह 1998, 2003, 2013 से लेकर 2018 तक लगातार जीतते आ रहे हैं. भोपाल नॉर्थ सीट से पांचवीं बार विधायक बने अकील को इस बीच सिर्फ एक बार हार का सामना करना पड़ा. 1993 में वह बीजेपी के रमेश चंद्र शर्मा से हार गए थे. आरिफ अकील के राजनैतिक करियर की ये पहली और आखिरी हार थी. इसके बाद से अब तक वह कोई चुनाव नहीं हारे हैं.

मोदी लहर में भी जीते
आरिफ अकील कांग्रेस के उन गिने चुने लोगों में हैं जो नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान की लहर के बाद भी 2013 में चुनाव जीते. आरिफ अकील दिग्विजय सरकार में गैस राहत मंत्री भी रह चुके हैं. भोपाल नॉर्थ सीट जिससे आरिफ चुनाव लड़ते हैं, ये मुस्लिम बाहुल्य सीट है. ऐसा नहीं है कि बीजेपी या अन्य पार्टियां इस सीट से मुस्लिम प्रत्याशी नहीं खड़ा करते हैं, इसके बाद भी आरिफ अकील जीत दर्ज करते हैं. इस बार बीजेपी ने आरिफ अकील के सामने फातिमा रसूल सिद्दीकी को उतारा था. फातिमा के पिता कभी कांग्रेसी हुआ करते थे. और उन्हें आरिफ अकील ने ही चुनाव हराया था.

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बीजेपी के बाबूलाल गौर ने पहले ही दे दी थी बधाई
भोपाल में उनके समर्थक कहते हैं कि आरिफ अकील ने जाति धर्म से उठकर काम किया है, इसीलिए उन्हें सफलता मिलती है. वह मौकापरस्त नहीं हैं. बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम बाबूलाल गौर ने उन्हें 2018 विधानसभा चुनाव से पहले ही जीत और कांग्रेस की सरकार बनने की बधाई दे दी थी. इसका वीडियो भी वायरल हुआ था. बाबूलाल गौर ने ये भी कहा था कि आरिफ को मंत्री भी बनाया जाएगा.

हर खेमे और जातिगत संतुलन के साथ बनाए गए मंत्री
आरिफ अकील के अलावा कमलनाथ के मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन पर पूरा ध्यान दिया गया है. मंत्रिमंडल में राज्य के तीनों बड़े नेता कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन वाले विधायकों को जगह दी गई है. मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री कमलनाथ के 11, दिग्विजय सिंह के नौ, ज्योतिरादित्य सिंधिया के सात और अरुण यादव खेमे के एक मंत्री को शामिल किया गया है.