भोपाल: भोपाल मेट्रो रेल के नामकरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. 7,000 करोड़ रुपए की लागत की भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा इसका नाम परमार राजा भोज के नाम पर ‘भोज मेट्रो’ करने की घोषणा पर कांग्रेस के स्थानीय विधायक आरिफ मसूद ने मंच से ही अपनी असहमति जता दी.

बृहस्पतिवार को यहां शिलान्यास समारोह के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घोषणा की कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को ग्यारहवीं सदी के परमार राजा भोज के नाम पर “भोज मेट्रो रेल” के तौर पर जाना जाएगा. इसके बाद भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद ने कार्यक्रम में अंत में धन्यवाद भाषण में मंच से इस पर असहमति जताते हुए कहा, दादा भाई राजा भोज के नाम से कई काम हो रहे हैं, इस प्रोजेक्ट का नाम राजा भोज मेट्रो नहीं, भोपाल मेट्रो ही रहने दिया जाए.

बृहस्पतिवार को यहां शिलान्यास समारोह के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घोषणा की कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को ग्यारहवीं सदी के परमार राजा भोज के नाम पर “भोज मेट्रो रेल” के तौर पर जाना जाएगा. कार्यक्रम में अंत में इस पर असहमति जताते हुए कांग्रेस के ही विधायक आरिफ मसूद ने कहा, दादा भाई राजा भोज के नाम से कई काम हो रहे हैं, इस प्रोजेक्ट का नाम राजा भोज मेट्रो नहीं, भोपाल मेट्रो ही रहने दिया जाए.

मसूद भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं. उन्होंने कार्यक्रम के बाद मीडियाकर्मियों से कहा कि उन्होंने अपना विचार रख दिया है और निर्णय करना सरकार पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा, मैं भोपाल में पैदा हुआ हूं, यहां से चुना गया हूं, हमारी पहचान भोपाल से है. इसलिए हम चाहते हैं कि इस परियोजना का नाम भोपाल के नाम पर रखा जाए. इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और सरकार पर निर्भर करता है.

दूसरी ओर, बीजेपी ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा का स्वागत किया है. कार्यक्रम में मौजूद भोपाल के महापौर और भाजपा नेता आलोक शर्मा ने मंच से ही मुख्यमंत्री कमलनाथ की घोषणा का स्वागत करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया.

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा ”राजा भोज भोपाल के संस्थापक थे. भोपाल की बड़ी झील का निर्माण भी भी राजा भोज ने करवाया था जो कि एशिया में सबसे बड़े मानव निर्मित जल स्त्रोत के रुप में विख्यात है. ऐसे कई उपहार राजा भोज ने भोपाल शहर को दिये. इसलिये परमार काल के इस महान राजा के नाम पर परिेयोजना का नामकरण एक स्वागत योग्य कदम है.

कांग्रेस विधायक मसूद की असहमति के बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने कहा, ” यह न केवल मसूद की ओर से अभद्रता है, बल्कि प्रोटोकॉल के खिलाफ भी है. कमलनाथ ने शिलान्यास समारोह के दौरान यह घोषणा की और उसी कार्यक्रम में मसूद ने अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री की घोषणा का विरोध किया.