नई दिल्ली। आध्यात्मिक गुरू भय्यूजी महाराज की मौत की खबर ने सभी को चौंका दिया है. आज दोपहर उन्होंने अपने सिर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली. अभी तक जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक उन्होंने घरेलू मामलों के चलने डिप्रेशन में आकर अपनी जान दे दी. पुलिस के मुताबिक एक नोट मिला है जिसमें उन्होंने घरेलू दबाव का जिक्र किया है. डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा कि हमने उनके घर से एक सुसाइड नोट बरामद किया है. इसमें उन्होंने घरेलू दबाव का जिक्र किया है लेकिन तनाव क्या था इसका खुलासा नहीं हुआ है.

कांग्रेस ने बोला हमला

वहीं, उनकी मौत पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और इसे लेकर शिवराज सरकार को निशाने पर लिया है. कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार भय्यूजी पर विशेष दर्जा स्वीकार करने और अपनी सरकार को समर्थन के लिए अत्यधिक दबाव डाल रही थी. लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इसे लेकर वह बहुत ज्यादा मानसिक दबाव में थे. इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए.

भय्यूजी ने ठुकराया था राज्यमंत्री का दर्जा 

गौरतलब है कि कुछ महीने पूर्व मध्यप्रदेश सरकार ने पांच धार्मिक नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था जिसमें भय्यूजी महाराज भी शामिल थे. सरकार के इस कदम के बाद विवाद खड़ा हो गया था. विवाद के बाद भय्यूजी ने घोषणा की थी कि वह राज्यमंत्री दर्जे का कोई लाभ नहीं लेंगे.

आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी की

उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश की सरकार ने नर्मदी नदी की रक्षा के लिए बनायी गयी समिति में शामिल कर मुझ पर जो भरोसा जताया है, उस पर मैं आम नागरिक की तरह खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगा. लेकिन राज्यमंत्री के दर्जे का किसी तरह का सरकारी लाभ नहीं लूंगा.

भय्यूजी ने कहा था, मैंने अपने जीवन में अब तक न तो लाभ का कोई पद ग्रहण किया है, न ही किसी पद का लाभ लिया है. लिहाजा में राज्यमंत्री दर्जे से मिलने वाली कोई भी सरकार सुख-सुविधा स्वीकार नहीं कर सकता.