भोपाल: अब से कोई तीन दशक पहले मध्य प्रदेश में सागर जिले के चकराघाट पर स्थित पद्माकर की प्रतिमा के करीब गर्मियों के मौसम में कथा वाचक पं. रामकृष्ण शास्त्री (अगरिया वाले) महाभारत पर प्रवचन करते हुए एक दृष्टांत अक्‍सर सुनाया करते थे. इसमें द्रौपदी के पास वन गमन के दौरान एक ऐसी बटलोई (दाल बनाने का पात्र) थी, जिसमें वह हाथ डालकर जो चाहती थीं, खाने की सामग्री निकाल लेती थीं. इन दिनों राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की जा रही घोषणाओं ने उस दृष्टांत को सजीव कर दिया है. लगता है कि द्रोपदी जैसी कोई बटलोई उनके भी हाथ लग गई है. वह जो चाहते हैं, वह निकालकर जनता को दे देते हैं. Also Read - मध्यप्रदेश: कमलनाथ ने लगाया अनोखा आरोप-रोज 3 झूठ बोलते हैं शिवराज सिंह चौहान

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चौहान बीते 14 सालों से राज्य के मुख्यमंत्री हैं. अब विधानसभा चुनाव करीब है. बीते एक साल में उन्होंने अनेकों ऐसी घोषणाएं कर डाली हैं, जिनकी जनता की तरफ से मांग उठती थी. यह अलग सवाल है कि उन पर कितना अमल हो पाया. फिर भी मुख्यमंत्री की घोषणाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. Also Read - मप्र में कमलनाथ चलाएंगे दागी और करोड़पतियों की सरकार! कांग्रेस के आधे से ज्यादा विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले

बीते कुछ समय की घोषणाओं पर गौर करें तो पता चलता है कि राज्य के अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन, छतरपुर में मेडिकल कॉलेज खोलने का ऐलान, अतिथि शिक्षकों का मानदेय दोगुना करने, अविवाहित युवतियों को पेंशन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय दोगुना, संबल योजना, गायों की रक्षा के लिए गौ मंत्रालय बनाने का ऐलान, राम गमन पथ के लिए 100 करोड़ रुपये मंजूरी जैसी कुछ घोषणाएं शिवराज ने की हैं.

कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराज की घोषणाओं पर चुटकी ली और कहा, “शिवराज को 10 सालों तक राम गमन पथ की याद तक नहीं आई, कांग्रेस ने बात की, तो उसके पीछे-पीछे चल दिए. गाय और भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा को दो महीने बाद चुनाव में जनता, झूठे वादे व भगवान राम और गौ-माता के नाम पर अपनी घोषणाओं को पूरा न करने पर सबक जरूर सिखाएगी.”

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कांग्रेस के आरोपों का शिवराज अपने ही अंदाज में जवाब देते हैं और कहते हैं, “जिन्हें यह नहीं पता कि मूली जमीन के भीतर उगती है या ऊपर, वे खेती-किसानी की बात करते हैं. जो अमेठी से एक उत्पाद नहीं बना पाए, वे ‘मेड इन चित्रकूट’ और ‘मेड इन मध्य प्रदेश’ की बात करते हैं.”

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इन दिनों शिवराज का शायद ही कोई दिन जाता हो, जब वह कोई नई बड़ी घोषणा न करते हों. राजनीतिक विश्लेषक साजी थॉमस का कहना है, “चुनाव करीब है, जीत सभी का लक्ष्य है, लिहाजा शिवराज भी चुनाव जीतने के लिए सारे दाव अजमा रहे हैं. वह मुख्यमंत्री हैं, इसलिए घोषणाएं किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस है, जो सत्ता में आने के लिए वादे किए जा रही है. यह तो चुनाव और राजनीति का गणित है कि जीत के लिए कुछ भी करो.”

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मध्य प्रदेश के खजाने का बुरा हाल है. यह देश के उन चार राज्यों में शुमार हो गया है, जहां की आर्थिक स्थिति खराब है. बाजार से कर्ज उठाना पड़ गया है; उसके बाद भी शिवराज के पास न जाने कौन-सा खजाना है, जिसके बल पर वे घोषणाओं की बरसात किए जा रहे हैं. ये घोषणाएं ठीक वैसी ही हैं, जैसे पांडवों की पत्नी द्रौपदी के पास एक बटलोई थी, जिससे वह जो चाहती थी, खाने का सामान निकाल लेती थीं. कहीं ऐसा न हो जाए कि शिवराज घोषणा करें और बटलोई से खाली हाथ ही बाहर आए.