इंदौर: अयोध्या मामले में केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट के गठन को मंजूरी दिये जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद के एक शीर्ष पदाधिकारी ने बुधवार को उम्मीद जताई कि यह ट्रस्ट भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण विहिप के प्रस्तावित उस मॉडल के मुताबिक कराएगा, जिसके तहत पिछले तीन दशक से पत्थर तराशे जा रहे हैं. Also Read - Muzaffarnagar Riots-2013: कोर्ट ने मंत्री, बीजेपी MLA समेत 12 नेताओं के खिलाफ केस वापस लेने की इजाजत दी

विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने फोन पर कहा, “हमें नवगठित ट्रस्ट से यही अपेक्षा है कि राम जन्मभूमि पर उसी मॉडल के मुताबिक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा जो राम जन्मभूमि न्यास ने पहले से तैयार कर रखा है. इस मॉडल के मुताबिक कई खंभों आदि का निर्माण भी हो चुका है जिन्हें भव्य राम मंदिर की कल्पना को ध्यान में रखते हुए आकार दिया गया है.” Also Read - राम जन्मभूमि अयोध्या में रामायण युग से जुड़े पांच तालाबों का होगा कायाकल्प, ये है सरकार की योजना

कोकजे ने कहा कि राम मंदिर के इस प्रचलित मॉडल से हजारों साधु-संतों और लाखों हिंदुओं की भावनाएं जुड़ी हैं. इस मॉडल को कई मौकों पर प्रदर्शित भी किया जा चुका है. Also Read - अयोध्या में 5 तालाबों का होगा जीर्णोद्धार, रामायण युग के बताए जाते हैं ये सरोवर

बता दें कि विहिप ने राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में वर्ष 1990 में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थरों को तराशना शुरू किया था. राम जन्मभूमि न्यास विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों का स्थापित ट्रस्ट है. इस ट्रस्ट की स्थापना अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से 18 दिसंबर 1985 को की गई थी.

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक मेंसुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार एक स्वायत्त ट्रस्ट के रूप में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. यह ट्रस्ट अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के निर्माण और उससे संबंधित विषयों पर निर्णय के लिये पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में यह घोषणा की. मोदी ने यह भी बताया कि सरकार ने अयोध्या कानून के तहत अधिग्रहीत 67.70 एकड़ भूमि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को हस्तांतरित करने का फैसला किया है.