इंदौर: मध्य प्रदेश के धार जिले में जगह-जगह बिखरे पड़े डायनासोर जीवाश्मों के दुर्लभ खजाने पर खतरा बढ़ता जा रहा है. सूचना के अधिकार (आरटीआई) से पता चला है कि जिले के बाग की मशहूर बौद्ध गुफाओं के पास करीब 90 हेक्टेयर पर बन रहे राष्ट्रीय डायनासोर जीवाश्म उद्यान की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए “अज्ञात नाबालिग बच्चों” ने इस विलुप्त जीव के कुछ जीवाश्मीकृत अंडे दिनदहाड़े चुरा लिये हैं. जानकारों के मुताबिक अण्डों के ये जीवाश्म लगभग 6.5 करोड़ साल पुराने हैं. मध्य प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रविवार को बताया कि सूचना के अधिकार के तहत वन विभाग द्वारा उन्हें मुहैया कराये दस्तावेजों में राष्ट्रीय डायनासोर जीवाश्म उद्यान से अंडों की चोरी की सात महीने पुरानी वारदात का विस्तृत खुलासा होता है. यह उद्यान बाग क्षेत्र के पाडल्या गांव में वन विभाग की ही देख-रेख में विकसित किया जा रहा है.

आरटीआई के तहत साझा किये गये दस्तावेजों में बाग के वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) का 17 सितंबर 2018 को लिखा सरकारी पत्र शामिल है जिसमें धार जिले के वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) को डायनासोर जीवाश्म चोरी की रिपोर्ट भेजी गयी है. इस पत्र में डीएफओ को बताया गया, “16 सितंबर 2018 को दोपहर 12 बजे के आस-पास कुछ अज्ञात नाबालिग बच्चों द्वारा पाडल्या (बाग) के राष्ट्रीय डायनासोर जीवाश्म उद्यान में अनाधिकृत रूप से प्रवेश कर वहां रखे बेशकीमती जीवाश्मों को तोड़ा गया और वे कुछ जीवाश्मों (डायनासोर के अंडे) को चुराकर अपने साथ ले भी गये.”

पत्र में बताया गया कि राष्ट्रीय डायनासोर जीवाश्म उद्यान में अण्डों की चोरी की इस वारदात के वक्त वहां के कर्मचारी और चौकीदार पौधों को टैंकर से पानी दे रहे थे. पत्र के मुताबिक “जैसे ही इन कर्मचारियों को घटना का पता चला, सभी कर्मचारी मौके की ओर गये. लेकिन इन्हें देखकर सभी बच्चे वहां से भाग गये. भागते बच्चों के फोटोग्राफ कर्मचारियों द्वारा लिये गये हैं जिनके आधार पर उनकी तलाश की जा रही है. इस घटना की सूचना पुलिस को भी दी गयी है. पुलिस द्वारा भी इन लोगों की तलाश की जा रही है.”

बहरहाल, धार जिले में डायनासोर जीवाश्मों की चोरी की यह कोई पहली घटना नहीं है. बाग के राष्ट्रीय डायनासोर जीवाश्म उद्यान से करीब 140 किलोमीटर दूर मशहूर पर्यटन स्थल मांडू के पास बनाये गये डायनासोर जीवाश्म संग्रहालय “अश्मधा” से भी जनवरी 2014 में तीन जीवाश्मीकृत अंडे चोरी हो चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक वारदात के पांच साल गुजर जाने ,के बावजूद जीवाश्म चोरों का अब तक पता नहीं चल सका है. गैर सरकारी खोजकर्ताओं के समूह “मंगल पंचायतन परिषद” ने वर्ष 2007 में पहली बार बाग क्षेत्र में डायनासोर के अंडे खोजे थे. परिषद के प्रमुख विशाल वर्मा ने बताया, “हमने गुजरे 12 साल के दौरान बाग क्षेत्र और इसके आस-पास के इलाकों में डायनासोर के 65 जीवाश्मीकृत घोंसले खोज निकाले हैं. इनमें डायनासोर के करीब 6.5 करोड़ साल पुराने 200 से ज्यादा अंडे मिले हैं.”