भोपाल. बाल विवाह रोकने के लिए सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले अभियान से जुड़े ई-वालेंटियर्स शुक्रवार को मध्य प्रदेश की राजधानी में जमा हुए. उन्होंने माना कि उनके लिए बाल विवाह को खत्म करना एक बड़ी चुनौती है. इन सभी ने अपने अनुभव भी साझा किए. लोकतंत्र और डिजिटल डेमोक्रेसी प्रक्रिया के तहत आयोजित ई-वालेंटियर्स मीट में राज्य के 13 जिलों के 65 ई-वालेंटियरों ने हिस्सा लिया. उन्होंने बाल विवाह की स्थिति पर चर्चा की और जमीनी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बाल विवाह रोकने के लिए सोशल मीडिया पर ‘नो टू चाइल्ड मैरिज’ अभियान चलाया.

कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों के ई-वालंटियर्स ने अपनी बात रखी. उज्जैन के सूरजभान सिंह ने बताया कि बाल विवाह ही नहीं, बाल सगाई भी एक मुद्दा है और इससे बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित हो रहे हैं. जबलपुर के परवेज खान ने बताया कि यदि बाल विवाह रुकवाने की पहल करवाई जाती है तो सामाजिक कार्यकर्ताओं को ही पार्टी बना दिया जाता है. शिवपुरी के अजय सिंह यादव ने बताया कि सहरिया समाज ने एक अच्छी पहल करते हुए उनके समाज में बाल विवाह को प्रतिबंधित किया है. विकास संवाद, यूनिसेफ, चाइल्ड राइट्स एंड यू और तेरेदेस होम्स द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकास संवाद के सचिन जैन ने कहा कि बच्चों के मुद्दों के लिए राजनीति होनी चाहिए, ताकि उन परिस्थितियों को संवाद के केंद्र में लाया जा सके.

उन्होंने बताया कि जनगणना 2011 में यह पता चला कि देश में एक करोड़ 21 लाख बच्चों के बाल विवाह हुए हैं. इनमें से तकरीबन आठ लाख बाल विवाह मध्य प्रदेश में हुए हैं. यूनिसेफ के संचार अधिकारी अनिल गुलाटी ने कहा कि बाल विवाह बाल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है और यह केवल भारत में ही नहीं दुनियाभर में बाल विवाह एक समस्या है. वैश्विक रूप से देखें कि हर पांच में से एक बालिका 18 साल से पहले वधू बन जाती है, और दुनियाभर में बाल विवाह का चालीस प्रतिशत हिस्सा भारत का है, इसे दूर करने के लिए हर संभव कोशिश करनी होगी.

यूनिसेफ की स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर वंदना भाटिया ने बताया कि कम उम्र में शादी किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य की ²ष्टि से सही नहीं है, इसका सीधा असर सुरक्षित मातृत्व पर पड़ता है. यूनिसेफ के नीति और क्रियान्वयन विशेशज्ञ सुजन सरकार ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के तथ्यों को सामने रखा. कार्यक्रम के अंत में सोशल मीडिया एक्सपर्ट सचिन श्रीवास्तव ने ‘हैशटैग से नो टू चाइल्ड मैरिज’ के साथ एक अभियान चलाया.