भोपाल. मध्यप्रदेश में पिछले करीब डेढ़ दशक से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए प्रदेश में विपक्षी पार्टियों के बीच गठबंधन की कवायद एक बार फिर रविवार को ध्वस्त हो गई. दरअसल, इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रविवार को प्रदेश के 8 प्रमुख विपक्षी दलों की भोपाल में बैठक हुई. बैठक में शामिल सभी दलों के सदस्य इस बात पर तो राजी थे कि भाजपा को इस बार सत्ता से हटा देना है, लेकिन प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को इस अभियान में शामिल किया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर इन दलों में एका नहीं बन पाया. ये आठों दल आगामी विधानसभा चुनाव में साथ मिलकर लड़ने को तैयार हैं, लेकिन कुछ पार्टियों का मत है कि इस संभावित गठबंधन से कांग्रेस को दूर रखा जाना चाहिए. यही वजह है कि भोपाल में आज हुई बैठक में भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने के मसले पर तो इन आठों पार्टियों के नेताओं की आपस में चर्चा हुई. सबने भाजपा को सत्ता से हटाने का संकल्प भी लिया, लेकिन कांग्रेस को इस गठबंधन में शामिल कर महागठबंधन बनाने के मुद्दे पर भाकपा एवं माकपा ने विरोध किया. इस कारण इन दलों का गठबंधन नहीं हो सका. Also Read - दिग्विजय सिंह अमर्यादित भाषा वाले आ रहे कॉल्‍स से हुए परेशान, बंद किया मोबाइल फोन

लोकतांत्रिक जनता दल के सलाहकार गोविन्द यादव ने बताया, ‘संवैधानिक लोकतंत्र बचाने एवं वैकल्पिक राजनीति की खातिर मध्यप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गैर-भाजपा राजनैतिक दलों के गठबंधन निर्माण के लिए आठ विभिन्न राजनैतिक दलों की बैठक भोपाल में हुई.’ उन्होंने कहा कि इस बैठक में लोकतांत्रिक जनता दल, भाकपा, माकपा, बहुजन संघर्ष दल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय समानता दल एवं प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी शामिल हुई. यादव ने बताया कि भाकपा एवं माकपा ने संपूर्ण विपक्षी एकता के लिए गैर भाजपा गठबंधन निर्माण पर सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की, लेकिन कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व पूर्ण गठबंधन नहीं करने का फैसला लिया. शेष अन्य दलों ने संपूर्ण विपक्षी एकता के लिए कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व पूर्ण गठबंधन का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इन आठों दलों की अगली बैठक सात अक्टूबर को पुनः आयोजित की गई है. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

गोविंद यादव वर्तमान में लोक क्रांति अभियान के संयोजक हैं. वह मध्यप्रदेश जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि बसपा द्वारा मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 22 प्रत्याशियों की 20 सितंबर को की गई घोषणा के बाद यह कदम उठाया जा रहा है, ताकि विपक्षी दलों के वोटों का विखराव न हो और भाजपा को लगातार चौथी बार सत्ता में आने से रोका जा सके. यादव ने बताया कि बसपा ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान गुरूवार को कर दिया और वह सभी 230 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी. इसलिए हम गैर भाजपा वोटों का और बिखराव होने से रोकने के लिए गठबंधन करेंगे, ताकि भाजपा को हराया जा सके. उन्होंने कहा कि विधानसभा के चुनाव के लिए अब बहुत कम समय बचा है. लंबे समय से महागठबंधन के लिए प्रयास कर रही कांग्रेस अब तक सफल नहीं हो पायी है. इसलिए हम इस महागठबंधन के लिए प्रयास कर रहे हैं. Also Read - यूपी: रायबरेली में सोनिया गांधी के 'लापता' होने के लगे पोस्टर, संसदीय क्षेत्र से बाहर होने पर उठे सवाल

(इनपुट – एजेंसी)