नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की सतना जिला जेल ने में चार साल की बच्ची की रेप के दोषी के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी किया है. स्कूल टीचर को 4 साल की छात्रा के रेप का दोषी पाया गया था. बच्ची से इस कदर दरिंदगी हुई थी कि उसे दिल्ली के एम्स में भर्ती कराना पड़ा था और उसकी कई सर्जरी की गई. आरोपी महेंद्र सिंह गोंड की फांसी जबलपुर की जेल में 2 मार्च को मुकर्रर की गई है. अधिकारियों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस सजा पर रोक नहीं लगाता है तो तय की गई तारीख पर दोषी टीचर को फांसी दे दी जाएगी. अपराध होने और अपराधी को दोषी साबित करने में केवल सात महीने का समय लगा. यदि उसे फांसी हो जाती है तो यह नए कानून के तहत पहला ऐसा मामला होगा जिसमें बच्चों के साथ रेप करने वाले को फांसी मिलेगी.

महेंद्र सिंह गोंड ने 30 जून 2018 की रात बच्ची का अपहरण किया था. टीचर ने बच्ची को जंगल में ले जाकर रेप किया और उसे वहीं मरा समझकर फेंक दिया. बच्ची के परिवार वालों ने उसे देर रात सीरियस कंडिशन में पाया और अस्पताल ले गए. राज्य सरकार ने तुरंत उसे एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजा. वारदात के बाद स्कूल टीचर को कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया गया था.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एक डिविजन बेंच ने महेंद्र को दी गई सजा पर 25 जनवरी को मुहर लगा दी और इस घटना को ‘गंभीरतम अपराध’ की श्रेणी का बताया. जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस अंजुलि पालो की बेंच ने कहा, ‘अदालत ऐसे क्रूर अपराधियों पर कठोर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हट सकतीं. ऐसी घटनाएं जब तेजी से बढ़ रही हों, तो सख्ती दिखाना और जरूरी हो जाता है. यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोपी एक शिक्षक है, जिसका काम बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाना होता है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद सतना की जिला अदालत ने दोषी के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी कर दिया.

जबलपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक गोपाल तामराकर का कहना है कि हमें फैसले की हार्ड कॉपी अभी नहीं मिली है जो डाक के माध्यम से आती है. एक ई मेल मिला है और उसके मुताबिक रेप के दोषी को 2 मार्च को सुबह 5 बजे फांसी दी जानी है. हालांकि अधिकारी के मुताबिक, दोषी महेंद्र गोंड के पास अभी दो विकल्प मौजूद हैं. वह चाहे तो सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के पास दया याचिका दे सकता है.

2018 में मध्य प्रदेश की अदालतों ने 21 अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई, इनमें से 18 अपराधी 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के दोषी हैं. मध्य प्रदेश में जिस आखिरी शख्स को फांसी दी गई थी वह शहडोल जिले का कामता प्रसाद था. हत्या के आरोपी कामता को 1996 में जबलपुर सेंट्रल जेल में फांसी पर लटकाया गया था.