नई दिल्‍ली: कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार गिरने के बाद पूरे देश के लोगों की निगाहें मध्‍य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर टिकी हुई हैं और अनुमान लगाया जा रहा है कि क्‍या यहां भी कर्नाटक पार्ट-2 दोहराया जा सकता है. कर्नाटक के सियासी बदलाव की हवा का रुख कुछ ऐसा यहां भी बहाने की कोशिश हो सकती है. दरअसल, मध्‍य प्रदेश विधानसभा में बीजेपी की सीनियर लीडर और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सदन में बुधवार को मुख्‍यमंत्री कमलनाथ से कह दिया कि अगर हमारे ऊपर वाले नंबर 1 या दो का आदेश हुआ तो 24 घंटे भी आपकी सरकार नहीं चल पाएगी. इस पर सीएम कमलनाथ ने कहा कि आपके ऊपर वाले नंबर एक और नंबर 2 समझदार हैं, इसलिए आदेश नहीं दे रहे हैं. आप चाहे तो अविश्‍वास प्रस्‍ताव (नो कॉफि‍डेंस मोशन) ले आएं.

विधानसभा में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ध्यानाकर्षण पर चर्चा के दौरान बुधवार को विपक्ष को बहुमत परीक्षण की चुनौती देते हुए कहा, विपक्ष चाहे तो वह कभी भी बहुमत का परीक्षण कर ले, हम आज ही इसके लिए तैयार है, यहां कोई विधायक बिकाऊ नहीं है. कांग्रेस की सरकार पूरे पांच साल चलेगी और दम के साथ चलेगी. विकास का एक ऐसा नक्शा बनेगा जो हर वर्ग के लिए होगा.

कमलनाथ जब अपनी बात कह रहे थे तभी बीच में नेता प्रतिपक्ष भार्गव ने कहा, “उनके दल को विधायकों की खरीद-फरोख्त जैसे कायरें पर विश्वास नहीं है, लेकिन उपर से नंबर एक और दो का आदेश हुआ तो राज्य में एक दिन भी नहीं लगेगा.”

 

बता दें कि एक दिन पहले मंगलवार को देर शाम में कर्नाटक की कुमारस्‍वामी सरकार गिरने के बाद एमपी के पूर्व सीएम शिवराजसिंह चौहान ने बयान दिया था कि अगर राज्‍य की कमलनाथ सरकार अपने अंतरविरोधों को लेकर कर्नाटक की तरह गिर जाए तो इसके लिए हम दोषी नहीं होंगे. इसके पूर्व भी बीजेपी महासचिव कैलाश विजयर्गीय भी सरकार को कभी भी गिराने की बात कह चुके हैं. उन्‍होंने भी कहा था कि अगर ऊपर वाले हां कर दें तो सरकार तुरंत गिरा देंगे.

मध्‍य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 114, बसपा के दो, सपा का एक और चार निर्दलीय विधायक हैं. विपक्षी भाजपा के 108 विधायक हैं. एक विधायक के सांसद बन जाने से एक स्थान अभी रिक्त है. बाहर से समर्थन देने वाले सभी विधायक मंत्री बनना चाहते हैं. अगर उनकी महत्‍वाकांक्षा जाग गई तो कमनाथ सरकार भी संकट से घिर सकती है.