भोपाल: सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करने और नाबालिगों को तंबाकू युक्त पदार्थ देने वालों के खिलाफ अब हेड कॉन्‍स्टेबल (प्रधान आरक्षक) और नगर पालिका अधिकारियों को जुर्माना वसूलने का अधिकार होगा. इस संदर्भ में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को परामर्शपत्र (एडवाइजरी) लिखा है. Also Read - कोरोना पॉजिटिव पाया गया BSF का हेड कांस्टेबल, मुख्यालय की 2 मंजिलें की गईं सील

आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी के मुताबिक, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा 2003) के तहत जुर्माना वसूलने और इस अधिनियम को लागू करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिवों को हेड कॉन्‍स्टेबल, नगरपालिका अधिकारी आदि को अतिरिक्त प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में अधिसूचित करने के लिए पत्र लिखा है. Also Read - दिल्ली में CAA पर झड़प में हेड कॉन्‍स्टेबल की जान गई, पत्‍नी, दो बेटियों और बेटे पर टूटा दुखों का पहाड़

कोटपा की धारा 25 के अनुसार, केंद्र व राज्य सरकारें प्रवर्तन अधिकारियों को अधिकृत कर सकती हैं. कोटपा 2003 की धारा चार (सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान प्रतिबंधित) और धारा छह (नाबालिगों और शैक्षणिक संस्थाओं के करीब धूम्रपान बेचने पर प्रतिबंध) के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पुलिस उप निरीक्षकों को अधिकृत किया गया है. इससे नीचे के अधिकारियों को अधिकृत नहीं किया गया है. Also Read - Delhi Police Head Constable Recruitment 2020: दिल्ली पुलिस में 12वीं पास के लिए निकली वैकेंसी, ऐसे करें अप्लाई, जानें डिटेल

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव विकास शील ने 25 अक्टूबर को जारी पत्र में कहा है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक देश है और दुनिया भर में तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश भी है. भारत में तंबाकू की वजह से हर साल मरने वालों की संख्या 13.5 लाख से ऊपर है.

संविधान के अनुच्छेद 47 में निहित सामान्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार लाने, बच्चों और युवाओं को इसका आदी होने, तंबाकू के उपयोग को रोकने पर जोर देने के लिए केंद्र सरकार ने तंबाकू के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए कोटपा को लागू किया है.

संबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के संजय सेठ ने इस फैसले पर कहा कि हेड कांस्टेबल की संख्या उप निरीक्षकों की तुलना में चार गुना से अधिक है और यह निर्णय निश्चित रूप से कोटपा के मजबूत कार्यान्वयन में मदद करेगा.