इंदौर: देश का एक शहर जिसे लगातार चौथी बार देश का सबसे स्‍वच्‍छ शहर घोषित किया गया है. बता दें कि केंद्र सरकार के सालाना स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार चौथी बार अव्वल रहकर इंदौर ने देश के सबसे साफ-सुथरे शहर का अपना प्रतिष्ठित खिताब बरकरार रखा है. आखिर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले शहर इंदौर की लगातार चौथी बार इस सफलता के पीछे क्‍या वजहें हैं. तो हम पाते हैं कि नागरिकों की भागीदारी, नवाचारों और टिकाऊ इंतजामों से इंदौर ने “सफाई का चौका” लगाया है. Also Read - नहीं मान रहा नेपाल, अब पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया भारत के क्षेत्रों को दिखाने वाला मैप

बता दें कि इंदौर, वर्ष 2017, 2018 और 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षणों में भी देश भर में अव्वल रहा था. Also Read - PM मोदी, प्रेसिडेंट पुतिन के बीच टेलिफोन पर हुई बातचीत, रिश्‍तों को मजबूत करने का लिया संकल्प

आवास और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को डिजिटल तरीके से आयोजित पुरस्कार समारोह के दौरान “स्वच्छ सर्वेक्षण 2020” के परिणाम जाहिर किए और इंदौर को “भारत का सबसे स्वच्छ शहर” घोषित किया. देश के 4,242 शहरों में किए गए इस सर्वेक्षण में कुल 1.9 करोड़ नागरिकों ने अपनी राय देकर भागीदारी की. Also Read - बीजेपी की पूर्व MLA पारुल साहू कांग्रेस में शामिल, मंत्री के खिलाफ लड़ सकती हैं चुनाव

इन कदमों ने बनाया नंबर वन
– इंदौर की स्‍वच्‍छता में कामयाबी की नींव में कचरा प्रबंधन और प्रसंस्करण की अलग-अलग योजनाएं हैं.
– – शहर में हर रोज तकरीबन 1,200 टन कचरे का सुरक्षित निपटारा करने की क्षमता विकसित की गई है
– इसमें 550 टन गीला कचरा और 650 टन सूखा कचरा शामिल है.
– लगभग 8,500 सफाईकर्मी 3 पालियों में सुबह 6 बजे से तड़के 4 बजे तक लगातार काम करते हुए शहर को चकाचक रखते हैं.
– शहर से बड़ी कचरा पेटियां काफी पहले ही हटा दी गई हैं.
– आईएमसी की 700 गाड़ियों से हर घर और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग जमा किया जाता है.
– इस्तेमाल किए गए डाइपर और सैनिटरी नैपकिन जैसे जैव अपशिष्टों को कचरा संग्रहण गाड़ियों में अलग रखा जाता है ताकि इनका सुरक्षित निपटारा किया जा सके.
– शहर में कचरा प्रसंस्करण संयंत्र सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर लगाए गए हैं ताकि ये वित्तीय रूप से टिकाऊ बने रहें.
– इंदौर के करीब 35,000 घरों में गीले कचरे से खाद बनाने वाली इकाइयां लगी हैं
– कचरे से खाद बनाने वाली इकाइयां होने से घरों से गीला कचरा बाहर निकलना कम हो रहा है.
– आईएमसी ने “थैला बैंकों” और “बर्तन बैंकों” की स्थापना के साथ ही घरों और होटल-रेस्तरांओं में बचे हुए भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए “फूड एटीएम” जैसे नवाचारी कदम भी उठाए हैं.
– इंदौर में सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों के इस्तेमाल पर काफी पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है.
– सीवेज के शोधित पानी का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा आईएमसी के 25 बगीचों में दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है.

यूजर चार्जेस 2019-20 में 60 गुना बढ़कर 36 करोड़ रुपए पर पहुंचा
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के लिए आईएमसी के सलाहकार असद वारसी ने बताया कि इन गाड़ियों के जरिये कचरा जमा किये जाने के बदले शहरी निकाय ने घरों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से वित्तीय वर्ष 2014-2015 में 60 लाख रुपए का शुल्क (यूजर चार्जेस) वसूला था, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 60 गुना बढ़कर 36 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया.उन्होंने बताया, “मौजूदा वित्तीय वर्ष में शहर से करीब 40 करोड़ रुपए का कचरा संग्रहण शुल्क वसूले जाने का अनुमान है.”वारसी ने बताया, “मौजूदा वित्तीय वर्ष में शहर से करीब 40 करोड़ रुपए का कचरा संग्रहण शुल्क वसूले जाने का अनुमान है.”

कचरा बोझ नहीं, कीमती संसाधन बना, 2019-20 में करीब छह करोड़ रुपए की कमाई हुई
आईएमसी के सलाहकार के मुताबि‍क, अब शहर में कचरा एक बोझ नहीं, बल्कि एक कीमती संसाधन बन चुका है. इन संयंत्रों के जरिए गीले और सूखे कचरे के प्रसंस्करण से आईएमसी को वित्तीय वर्ष 2019-20 में करीब छह करोड़ रुपए की कमाई हुई थी. अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 में यह कमाई बढ़कर 10 करोड़ रुपए के आस-पास पहुंच सकती है.”

“चौका लगाएंगे” का नारा साकार
केंद्रीय मंत्री की घोषणा के साथ ही इंदौर नगर निगम (आईएमसी) का “चौका लगाएंगे” का नारा साकार हो चुका है और इस कामयाबी के बाद शहर भर में जश्न का माहौल है. खुशी से सराबोर सफाई कर्मियों ने सड़कों पर रंगोली बनाकर उत्सवी रंग बिखेरे. इन रंगोलियों में “इंदौर नंबर 1” भी उकेरा गया था. इंदौर लोकसभा क्षेत्र के सांसद शंकर लालवानी ने ढोल की थाप पर महिला सफाई कर्मियों के साथ नाचकर खुशी जाहिर की.

आईएमसी की आयुक्त ने बधाई दी
आईएमसी की आयुक्त प्रतिभा पाल ने एक संदेश में कहा, “स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार चौथी बार अव्वल रहने के लिए मैं इंदौर के सभी जागरूक नागरिकों और जन प्रतिनिधियों को बधाई देती हूं. शहर के मेहनती सफाई कर्मी भी इस मौके पर बधाई के हकदार हैं, जिन्होंने हर मौसम में शहर को साफ रखने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है.”