इंदौर: मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष के एक विवादास्पद बयान की पृष्ठभूमि में फिर सूबे के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि उन्हें किसी भी पद की आकांक्षा नहीं है और अगर वह चाहते, तो साल भर पहले संपन्न विधानसभा चुनावों के तत्काल बाद जोड़-तोड़ कर फिर मुख्यमंत्री बन सकते थे. शिवराज ने खुद को “नैतिक व्यक्ति” बताते हुए कहा, “अगर मुझे फिर मुख्यमंत्री बनना होता, तो मैं तभी (गत विधानसभा चुनावों के तत्काल बाद) जोड़-तोड़ कर लेता.”

गोपाल भार्गव ने कहा था- दीपावली के बाद शिवराज फिर लेंगे मुख्यमंत्री की शपथ
बता दें कि नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल भार्गव ने कल मंगलवार को झाबुआ में एक सभा में “वादा” किया था कि इस विधानसभा सीट पर 21 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी भानु भूरिया के ज्यादा से ज्यादा मतों से जीतने की स्थिति में शिवराज दीपावली के बाद राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर एक बार फिर शपथ लेंगे. हालांकि, विवाद बढ़ने पर भार्गव ने सफाई देते हुए इस बयान को “महज चुनावी कथन” बताया था.

सभी पदों से ऊपर हूं, किसी भी पद की आकांक्षा नहीं
नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के वक्त खुद शिवराज भी मंच पर मौजूद थे. भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने इस कथन के बारे में पूछे जाने पर इंदौर मेें संवादाताओं से कहा, “जहां तक मेरा सवाल है, मैं सभी पदों से ऊपर हूं. मुझे किसी भी पद की आकांक्षा नहीं है. मेरा एकमात्र पद सूबे की साढ़े सात करोड़ जनता के दिल में रहकर उसकी सेवा करना है.”

13 साल से ज्‍यादा लगातार एमपी के सीएम रहे शिवराज
शिवराज 29 नवंबर 2005 से 16 दिसंबर 2018 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे. पिछले साल नवंबर में संपन्न विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा को सीटों के नजदीकी अंतर से मात देते हुए कांग्रेस 15 साल के लम्बे अंतराल के बाद सूबे की सत्ता में लौटी थी.

चौहान ने खुद को बताया नैतिक व्‍यक्ति
शिवराज ने खुद को “नैतिक व्यक्ति” बताते हुए कहा, “अगर मुझे फिर मुख्यमंत्री बनना होता, तो मैं तभी (गत विधानसभा चुनावों के तत्काल बाद) जोड़-तोड़ कर लेता.”

नेता प्रतिपक्ष भार्गव के बयान पर दी ये सफाई
बहरहाल, भार्गव के विवादास्पद बयान से जुड़े सवालों पर शिवराज ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने “जन भावनाओं के मद्देनजर” कुछ गलत नहीं बोला. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “जनता के बीच जन भावनाएं देखकर ही बोला जाता है. झाबुआ के युवा सम्मेलन में बच्चे “मामा- मामा” (शिवराज का लोकप्रिय उपनाम) चिल्ला रहे थे. इस पर भार्गव ने पूछ लिया कि क्या वे मुझे फिर सूबे का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, तो लोगों ने इसका “हां” में जवाब दिया.”

लोग मुझे मुख्‍यमंत्री के रूप में फिर देखना चाहते हैं
शिवराज ने दावा किया कि राज्य के कई लोग मई में संपन्न लोकसभा चुनावों से पहले ही कहते आ रहे हैं कि वे उन्हें फिर मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं.

मध्यप्रदेश को चील-कौवों की तरह नोंच कर खा रहे
कमलनाथ सरकार पर भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शिवराज ने कहा, “ये लोग (कांग्रेस सरकार के मंत्री) मध्यप्रदेश को चील और कौवों की तरह नोंच-नोंच कर खा रहे हैं.”

सड़क की तुलना गालों से…कांग्रेस नेताओं की मानसिकता कैसी?
मध्यप्रदेश की खराब सड़कों को सुधारकर मशहूर अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी के गालों जैसी बनाने के वादे को लेकर सूबे के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के बयान की पूर्व मुख्यमंत्री ने आलोचना की. उन्होंने कहा, “यह कैसे मंत्री हैं, जो सड़कों की तुलना गालों से करते हैं? इस बयान से सिद्ध होता है कि कांग्रेस नेताओं की मानसिकता कैसी है.”

निवेशक सम्मेलन का विरोध नहीं करूंगा
शिवराज ने एक सवाल पर कहा कि वह इंदौर में 18 अक्टूबर को आयोजित निवेशक सम्मेलन के मद्देनजर प्रदेश की कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार की औद्योगिक नीतियों का फिलहाल विरोध नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, “मैं ऐसा नेता नहीं हूं कि निवेशक सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश सरकार की आलोचना करूं. मैं उद्योगपतियों से अपील करता हूं कि वे हमारे राज्य में निवेश कर रोजगार के अवसर उत्पन्न करें.”