इंदौर: मध्‍य प्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को नए कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ हमला बोलने के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साधा. Also Read - WB Election 2021: ब्रिगेड परेड ग्राउंड में PM Modi की मेगा रैली आज, Mithun Chakraborty भी होंगे शामिल

एमपी के पूर्व सीएम दिग्‍व‍िजय सिंह ने कहा, ”हम मोहन भागवत से पूछना चाहते हैं कि अगर मोदी जी संघ और किसानों की बात नहीं सुन रहे हैं तो RSS मोदी जी को समर्थन देना बंद करे. हमारे साथ सड़क पर आएं. इसमें कोई राजनीति नहीं है. Also Read - किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे, हरियाणा में किसानों ने ब्लॉक किया एक्सप्रेसवे; कृषि मंत्री बोले- सरकार कानूनों में संशोधन के लिए तैयार

‘भारत बंद’ के दौरान इंदौर में छावनी क्षेत्र स्थित संयोगितागंज अनाज मंडी में कांग्रेसों के विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए सिंह ने कहा, “भागवत (संघ समर्थित) भारतीय किसान संघ (बीकेएस) से कहें कि वह नए कृषि कानून वापस लेने की मांग को लेकर (आंदोलनरत) किसानों के साथ खड़ा रहे और धरना दे. अगर वे ऐसा नहीं करेंगे, तो हम मानेंगे कि आप सब नाटक-नौटंकी केवल वोट के लिए करते हैं और समाज एवं धर्म के नाम पर महज राजनीति करते हैं.”

उन्होंने मोदी सरकार पर हमले जारी रखते हुए कहा, “जैसा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी के संरक्षण में सूट-बूट की सरकार चल रही है, जबकि दूसरी ओर गरीब, किसान, छोटे व्यापारी, मजदूर, हम्माल और तुलावटी हैं.”

राज्यसभा सांसद ने मोदी सरकार से नए कृषि कानूनों को तत्काल वापस लेने की मांग की और कहा कि प्रधानमंत्री सर्वदलीय संसदीय समिति बनाकर किसानों के मसले सुलझाएं.

बता दें संघ समर्थित बीकेएस ने सोमवार को कहा था कि वह नए कृषि कानूनों के खिलाफ मंगलवार को बुलाए गए ”भारत बंद” का समर्थन नहीं करता है, लेकिन इन कानूनों में कुछ सुधार होने चाहिए.

सिंह ने इंदौर में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान दावा किया, “नए कृषि कानूनों के अमल में आने के बाद कॉर्पोरेट क्षेत्र के बड़े उद्योगपति भारत के कृषि उत्पादों का वह विशाल बाजार हथिया लेंगे, जिसका आकार 12 लाख करोड़ रुपए और 15 लाख करोड़ रुपए के बीच आंका जाता है.”

दिग्‍व‍िजय सिंह ने कहा कहा, “बड़े उद्योगपति मनमाने दाम पर किसानों की उपज खरीदेंगे. इससे देश के कारोबारी उनके कमीशन एजेंट बनने को मजबूर हो जाएंगे.”

राज्यसभा सांसद ने यह दावा भी किया कि अमेरिका सरीखे विकसित देशों के हितों की पैरवी करने वाले विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के “दबाव में” मोदी सरकार ने वर्ष 2015 में इस निकाय के साथ “गुप्त समझौता” किया था और भारत के नए कृषि कानून इस कथित करार का ही परिणाम है.

उन्होंने आरोप लगाया, “नए कृषि कानून गरीबों को सस्ता अनाज मुहैया कराने वाली उचित मूल्य की दुकानें और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों से फसलों की खरीदी समाप्त करने के षड्यंत्र की शुरूआत हैं, ताकि बड़े उद्योगपति किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों का शोषण कर सकें.”

सिंह ने कहा, “गेहूं, चना और सोयाबीन सरीखी फसलें एमएसपी से नीचे बिकने के कारण किसानों को घाटा हो रहा है. आखिर हम अन्नदाताओं को लेकर मोदी के वचनों पर भरोसा कैसे करें?”