भोपाल. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से महीने पहले मुंगावली और कोलारस विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. कांग्रेस के लिए ये सीटें प्रतिष्ठा का सवाल बन गई थीं. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी ने अपनी पूरी कैबिनेट को इन सीटों पर प्रचार के लिए उतार दिया था. सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी इन सीटों पर जबर्दस्त तरीके से प्रचार किया था. ये दोनों ही सीटें गुना से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की संसदीय सीट में आती हैं. 

ब्लॉगः मुंगावली-कोलारस उपचुनावों के संकेत: जनता को हल्के में न लें बड़े दल

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बीजेपी के लिए ये हार किसी झटके से कम तो नहीं लेकिन आंकड़ों ने पार्टी को खुद को संतोष देने वाली स्थिति में तो ला ही दिया है. कांग्रेस की जीत के अंतर दोनों ही सीटों पर कम हो गए हैं. बीजेपी के राज्य में प्रमुख नंदकुमार चौहान ने कहा कि पार्टी ने कांग्रेस की परंपरागत सीट पर वोट शेयर बढ़ाने में सफलता हासिल की है. Also Read - ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम बनाने के बयान पर हार्दिक ने दी सफाई, बोले...

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में मुंगावली सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह को 70 हजार 808 वोट मिले. सिंह ने बीजेपी के बाईसाहब यादव को 2 हजार 123 वोटों के मामूली अंतर से हराया. वहीं, 2013 के चुनाव में कांग्रेस को इस विधानसभा सीट पर 20 हजार 765 वोटों के अंतर से जीत मिली थी. इस चुनाव में कोई तीसरा दल मैदान में नहीं था. नोटा को कुल 2 हजार 253 वोट मिले, जो जीत के अंतर से अधिक थे. यहां 2013 में बीएसपी उम्मीदवार को 12 हजार 081 वोट मिले थे.

कांग्रेस ने कोलारस सीट पर भी जीत हासिल की है. इस सीट पर पार्टी की जीत का अंतर 8 हजार 083 वोट का है, जो 2013 में 24 हजार 953 का था. बीएसपी कैंडिडेट को 2013 में इस सीट पर 23 हजार 920 वोट मिले थे. कांग्रेस के महेंद्र सिंह यादव को इस सीट पर 82 हजार 515 वोट मिले जबकि बीजेपी के देवेंद्र सिंह को 74 हजार 432 वोट. मुंगावली से उलट कोलारस में वोटों की गिनती देर शाम तक चलती रही.

2013 में हुए विधानसभा चुनाव में इन दोनों ही सीटों पर बीएसपी को अच्छे खासे वोट मिले थे लेकिन इन उपचुनावों में पार्टी ने किसी भी सीट पर उम्मीदवार खड़े नहीं किए. कांग्रेस की कमान युवा सांसद सिंधिया के हाथ में थी. उन्हें चुनाव प्रचार अभियान में पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ, प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया और सहरिया जनजाति में गहरी पैठ रखने वाले मनीष राजपूत का भरपूर साथ मिला.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस हार को स्वीकारते हुए कहा है कि, यह दोनों क्षेत्र कांग्रेस के थे. यहां आम चुनाव में कांग्रेस बड़े अंतर से जीती थी. उसके बाद भी बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने काफी मेहनत की और मुकाबले को बनाए रखा. बीजेपी बहुत कम अंतर से हारी है.

वहीं, कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव का कहना है कि, बीजेपी आगामी चुनाव में 200 पार का नारा दे रही है और दो विधानसभा चुनाव को तो पार कर नहीं पाई है. यह चुनाव बीजेपी के खिलाफ पनपते आक्रोश की जीत है. इस जीत में सांसद सिंधिया और कार्यकर्ताओं की मेहनत का बड़ा योगदान रहा है. राजनीति के जानकारों की मानें तो इन नतीजों से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, मगर कांग्रेस में उत्साह का संचार जरूर होगा.