नई दिल्ली: अब तक बाज़ार में चीनी मूर्तियों का कब्ज़ा रहता था. लोग भी चीनी मूर्तियाँ ही खरीदते थे, लेकिन हालात बदले से लग रहे हैं. लोग भारत में बनी चीज़ों को ही खरीदने पर ज़ोर दे रहे हैं. गणेश जी की मूर्तियाँ भी इनमें से एक हैं. देश में ही अलग-अलग तरह से स्थानीय स्तर मूर्तियाँ बनाई जा रही हैं. Also Read - छत्तीसगढ़ के किसानों, वनवासियों, गोबर विक्रेताओं के खाते में पहुंचे 1737.50 करोड़ रुपए, राजीव गांधी जयंती पर तोहफा

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक लेडी कलाकार ने ऐसी मूर्तियाँ बनाई हैं, जिसे खूब तारीफ़ मिल रही है. मिट्टी या किसी और चीज़ से नहीं बल्कि ये मूर्तियाँ गोबर से बनाई गई हैं, लेकिन बिलकुल पता नहीं चलता कि मूर्तियाँ गोबर से बनाई गई हैं. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए एक कलाकार ने इको फ्रेंडली मूर्तियां बनाई हैं. Also Read - बीजेपी विधायक ने कोरोनावायरस से निपटने का दिया मंत्र, कहा- गोमूत्र, गोबर का इस्तेमाल से किया जा सकता है इलाज

वह बताती हैं कि “हमने गोबर से गणेश जी की मूर्तियां बनाई हैं. ये मूर्तियां आसानी से विसर्जित हो जाती हैं. पानी में आसानी से घुल जाएंगी, जबकि बाकी मूर्तियों में केमिकल मिला होता है, जो पाने के लिए बहुत नुकसानदायक होता है. वह कहती हैं कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ आया है मुझे लोग काफी प्रोत्साहित कर रहे हैं.’ Also Read - खेती में गाय का गोबर और गोमूत्र इस्तेमाल करें किसान: यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ