इंदौर: कांग्रेस से चुनावी गठबंधन की कोशिश में जुटे संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने मध्यप्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल से कम से कम 15 विधानसभा सीटें मांगी हैं. इसके साथ ही, कांग्रेस को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि वह तीन दिन के भीतर इस प्रस्तावित तालमेल पर फैसला कर ले. जयस के राष्ट्रीय संरक्षक हीरालाल अलावा ने शनिवार को इंदौर प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से कहा, “चुनावी गठबंधन के लिए कांग्रेस से हमारी चर्चा जारी है. हम मालवा-निमाड़ अंचल की कम से कम 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि कांग्रेस इन सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे और हमें समर्थन दे.”

जयस के राष्ट्रीय संरक्षक हीरालाल अलावा ने कहा, “अगर 30 अक्टूबर तक चुनावी गठबंधन पर हमारी कांग्रेस से सहमति नहीं बनी, तो हम आगामी चुनावों में अपने नेताओं को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतारेंगे.” अलावा ने बताया कि वह धार जिले के कुक्षी विधानसभा क्षेत्र से खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं और जयस ने चुनावी गठबंधन की चर्चाओं के दौरान कांग्रेस से उसके कब्जे वाली यह सीट भी मांगी है.

अलावा ने कहा, “कुक्षी क्षेत्र हमारे संगठन का गढ़ है. इसलिए इस सीट पर हमारा स्वाभाविक दावा है.” बता दें कि वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में कुक्षी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह बघेल “हनी” ने अपने नजदीकी प्रतिद्वन्द्वी को 42,768 मतों से पराजित किया था.

‘अबकी बार, आदिवासी सरकार’ का चुनावी नारा देने वाला जयस हालांकि, एक राजनीतिक दल के रूप में चुनाव आयोग में अभी पंजीकृत नहीं है, लेकिन उसकी अलग-अलग सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार उतारकर इन्हें समर्थन देने की योजना है. इस बीच, जयस की सहयोगी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) ने इस नए संगठन को आगाह किया है कि वह कांग्रेस से चुनावी तालमेल हर्गिज न करे.

समाजवादी पार्टी से चुनावी गठबंधन करने वाली गोंगपा के राष्ट्रीय महासचिव बलबीर सिंह तोमर ने कार्यक्रम में कहा, “कांग्रेस हम जैसे छोटे सियासी दलों को उसी तरह अपने पास बुलाती है, जैसे छोटे बच्चों को लॉलीपाप दिखाकर ललचाया जाता है. कांग्रेस छोटे दलों को खत्म करने का षड्यंत्र रच रही है.”

उन्होंने कहा, “हमने कांग्रेस की चुनावी लॉलीपाप की तरफ देखना बंद कर दिया है. मैं जयस से भी कहना चाहता हूं कि वह भी कांग्रेस की इस लॉलीपाप की तरफ न देखे.”

तोमर ने कहा, “हम कांग्रेस के पास (चुनावी गठबंधन की) भीख मांगने नहीं गए थे, बल्कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ हमारे पास (चुनावी गठबंधन की) भीख मांगने आये थे, क्योंकि उनकी पार्टी राज्य की सत्ता से पिछले 15 साल से वनवास में है.”