नई दिल्ली. मध्य प्रदेश कांग्रेस में तमाम तरह की गुटबाजी की आ रही खबरों के बीच शीर्ष नेतृत्व ने कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष और ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रचार समिति का चेयरमैन नियुक्त किया है. इससे ये साफ होता है कि कमलनाथ संगठन का काम देखेंगे और ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रचार की कमान थामेंगे. पार्टी ने इस फैसले से एक तीर से दो निशाने साधे हैं. उसने संकेत दिया है कि इन दोनों के नेतृत्व में प्रदेश का चुनाव लड़ेगी. एक तरफ कमलनाथ के लंबे राजनीतिक अनुभव का फायदा उठाएगी, वहीं दूसरी ओर ज्योतिरादित्य को आगे कर वह युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश करेगी. प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि सिंधिया ही पार्टी के चेहरा हैं और अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो वह मुख्यमंत्री बन सकते हैं.

साल 2014 के चुनाव से पहले बीजेपी ने प्रचार समिति का अध्यक्ष नरेंद्र मोदी को बना इस पद को काफी महत्वपूर्ण बना दिया था. राजनाथ सिंह उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और उन्होंने कई शीर्ष नेताओं की नाराजगी के बीच नरेंद्र मोदी को प्रचार की जिम्मेदारी दे दी थी.  हालांकि, बाद में मोदी का आधिकारिक तौर पर बीजेपी का पीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था. उसके बाद से ही देश की राजनीति में चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष की भूमिका बढ़ती चली गई. साल 2014 में ही कांग्रेस ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में चुनाव लड़ा, लेकिन प्रचार की कमान राहुल गांधी को सौंपी थी. ऐसे में लगता है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस भी राजनीति के इस नए ट्रेंड पर चलने जा रही है.

उपचुनाव में शिवराज को चुनौती
ज्योतिरादित्य सिंधिया के चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट होती दिख रही है. सिंधिया की छवि एक युवा नेता की है. उनके भाषण भी लोगों को काफी प्रभावित करते हैं. हाल में वह जिस तरह से उप चुनाव में सीधे-सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनौती देते दिखे थे, उससे व एक मजबूत नेता के तौर पर स्थापित हुए हैं. शिवराज सिंह चौहान पूरा जोर लगाने के बाद भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की बनाई रणनीति को भेद नहीं पाए और उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हुए थे.

दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हुए थे.

सिंधिया का संकल्प
हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया का संकल्प भी काफी चर्चा में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश की बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद ही वह माला पहनेंगे. इसके जवाब में बीजेपी के कुछ नेताओं ने कहा था कि उन्हें फूलों से एलर्जी है. इसलिए वह ऐसा बयान दे रहे हैं. इसके जवाब में सिंधिया के लोगों ने कई ऐसे फोटो और वीडियो जारी किए, जिसमें वह फूल-माला से सरोबार थें.

लगातार सक्रिय रहे
ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश में पिछले साल से ही काफी सक्रिय हैं. किसानों के मुद्दे पर हो रहे आंदोलन में उन्हें बढ़-चढ़ कर भाग लेते देखा गया. वह राज्य के किसानों के मुद्दे पर धरने पर बैठे थे. वह ग्वालियर क्षेत्र ही नहीं पूरे राज्य में लगातार दौरे कर रहे थे. व्यापम हो, युवाओं के मुद्दे हों, महिलाओं का मुद्दा हो ज्योतिरादित्य राज्य में सक्रिय रहे. मध्यप्रदेश की राजनीति का चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह के छह महीने के लिए नर्मदा यात्रा पर चले जाने के बाद सिंधिया और सक्रिय दिखे. उन्होंने राज्य में कभी भी ऐसा नहीं लगने दिया कि एक बड़ा नेता नहीं है. हर जगह वह अपनी मौजूदगी और एक मजबूत विपक्ष के नेता के तौर पर डटे दिखे. यही कारण है कि आज वह मध्यप्रदेश कांग्रेस में प्रचार का चेहरा बने हैं.

युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया.

युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया.

गुटबाजी को खत्म करना होगा
मध्यप्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ कांग्रेस के बड़े नेताओं में आते हैं. इन तीनों की गांधी परिवार से नजदीकी भी जगजाहिर है. दूसरी तरफ अरुण यादव, बाला बच्चन, जितू पटवारी जैसे नेता भी क्षत्रप के तौर पर स्थापित हैं. ऐसे में काफी समय से वहां गुटबाजी की बात सामने आ रही थी. कई लोगों का मानना है कि प्रदेश में एंटी इनकम्बेंसी का माहौल है, लेकिन कांग्रेस की गुटबाजी उसका फायदा नहीं उठा पा रही है. हाल ही में बाला बच्चन ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव पर पक्षपात तक का आरोप लगाया था. ऐसे में जब छह महीने बाद राज्य में चुनाव है, कांग्रेस ने ज्यादिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ को बड़ी जिम्मेदारी है. उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह पार्टी में गुटबाजी को खत्म करे और जनता के बीच पूरे दमखम से जाएं.

यह है उनका करियर
ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले सिंधिया गुना से सांसद हैं. आज भी क्षेत्र के लोग उन्हें महाराजा ही कहते हैं. उनके पिता माधव राव सिंधिया कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खास दोस्तों में एक थे. ऐसे में पिता से मिली विरासत को ज्योतिरादित्य सिंधिया बखूबी आगे ले जा रहे हैं. एक जनवरी 1971 को जन्म सिंधिया ने कैंपेन स्कूल में पढ़ाई शुरू की और फिर दून स्कूल में पढ़ने चले गए. साल 1993 में उन्होंने हारवर्ड यूनिवर्सिटी से इकॉनमिक्स में ग्रेजुएशन किया. साल 2001 में स्टेनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से उन्होंने एमबीए किया. साल 2002 में वह गुना से पहली बार सांसद बने. इसके बाद साल 2004, 2009 और 2014 में वह फिर सांसद बनकर आए. यूपीए सरकार में उन्होंने कई केंद्रीय मंत्रालय को संभाला.