भोपाल: प्रदेश में चल रहे सियासी संकट के बीच मध्यप्रदेश की कैबिनेट ने बुधवार को प्रदेश में तीन नये जिलों मैहर, नागदा एवं चाचौड़ा के गठन को मंजूरी दे दी है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें तीन नये जिलों के गठन का निर्णय लिया गया है. मध्यप्रदेश में 52 जिले हैं और इन तीन जिलों के गठन के बाद संख्या 55 हो जाएगी. Also Read - डॉक्टर ने कार को बनाया घर, कुछ यूं कर रहे मरीज़ों का इलाज, लोग बोले- ऐसे कोरोना फाइटर्स को सलाम

मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पी सी शर्मा ने कैबिनेट बैठक के बाद यहां संवाददाताओं को बताया, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें तीन नये जिलों के गठन का निर्णय लिया गया है. नागदा, मैहर एवं चाचौड़ा नए जिले बनाए गए हैं. इनकी लंबे समय से क्षेत्रीय जनता एवं स्थानीय विधायकों द्वारा लगातार मांग की जा रही थी. Also Read - भोपाल में हिस्‍ट्रीशीटरों समेत उपद्रवियों की भीड़ ने पुलिस पर किया हमला

बता दें कि चाचौड़ा वर्तमान में गुना जिले में आता है, जबकि मैहर सतना जिले और नागदा उज्जैन जिले में आता है. वर्तमान में मध्यप्रदेश में 52 जिले हैं और इन तीन जिलों के गठन के बाद संख्या 55 हो जाएगी. Also Read - कांग्रेस ने सांसदों के वेतन में कटौती का स्वागत किया, सांसद निधि बहाल करने की मांग

शर्मा ने तीनों जिलों के रहवासियों को बधाई एवं शुभकामनांए देते हुए कहा कि इन्हें नया जिला बनाने से मैं समझता हूं कि वहां की प्रशासनिक व्यवस्था और सुधर जाएगी.

मैहर विधानसभा सीट के भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी लंबे समय से मैहर को नया जिला बनाने की मांग कर रहे थे, जबकि चाचौड़ा के कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह एवं नागदा-खाचरोद के कांग्रेस विधायक दिलीप सिंह गुर्जर क्रमश: चाचौड़ा एवं नागदा को जिला बनाने की गुहार लगा रहे थे.

लक्ष्मण सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय के छोटे भाई हैं और उन्होंने कुछेक महीने पहले चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग को लेकर यहां दिग्विजय सिंह के आवास पर धरना भी दिया था.

मध्यप्रदेश में सियासी संकट के बीच पिछले चार-पांच दिन से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी मुख्यमंत्री को यहां उनके निवास पर अपनी विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर लगातार मिलने जा रहे थे और कह रहे थे कि कमलनाथ की सरकार बहुमत में है.

जब उनसे सवाल किया जा रहा था तो त्रिपाठी मीडिया से कह रहे थे कि वह विकास के साथ हैं. हालांकि, 10 मार्च को त्रिपाठी ने प्रदेश के ताजा राजनीतिक हालातों के मद्देनजर भाजपा के साथ बने रहने की बात कही थी.

इससे पहले गत वर्ष जुलाई में विधानसभा में एक विधेयक पर मतदान के दौरान भाजपा के विधायकों नारायण त्रिपाठी (मैहर) और शरद कोल (ब्यौहारी) ने प्रदेश की कांग्रेस नीत सरकार को समर्थन देकर भाजपा को सकते में डाल दिया था.