नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में किसानों की कर्जमाफी और कन्या विवाह योजना जैसी लोकलुभावन वादों को पूरा करने के लिए कांग्रेस सरकार शराब ठेके की लाइसेंस फीस में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती है. इससे राज्य में शराब महंगी हो जाएगी. सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट मीटिंग में शराब पर कर में वृद्धि का फैसला लिया जा सकता है. आबकारी विभाग के अधिकारी के मुताबिक ‘नई आबकारी नीति के तहत एक्साइज ड्यूटी के कारण शराब महंगी हो सकती है. प्रदेश में शराब ठेका महंगा होने के कारण शराब की कीमत में 5 से 10 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो सकती है, जिसके बाद शराब निर्माता और ठेकेदारों को शराब की नई कीमत तय करना होगा. Also Read - बिहार में सीट बंटवारे को लेकर RJD ने कांग्रेस से की अपील, कहा- ज़िद छोड़ें, नुकसान हो जाएगा

राज्य सरकार के इस फैसले से 500 से 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है. बता दें कि 2018-19 में शराब की दुकानों के लाइसेंस का नवीनीकरण 15 फीसदी फीस बढ़ाकर किया गया था. इससे इस वित्तीय वर्ष में करीब नौ हजार करोड़ रुपये की आय मिलने का अनुमान लगाया है. राजस्व में वृद्धि के लिए आबकारी से होने वाली आय को बढ़ाने की तैयारी है. Also Read - MP: Viral Video में पत्‍नी को पीटते दिखे थे ये सीनियर IPS अफसर, आखिर सस्‍पेंड किए गए

सरकार कैबिनेट मीटिंग में शराब के ठेकों के स्थान पर भी चर्चा कर सकती है. इससे पहले शिवराज सरकार ने गर्ल्स स्कूल, छात्रावास, धार्मिक स्थल और हाइवे से 50 मीटर की दूरी तक शराब की दुकाने खोलने पर प्रतिबंध लगाया था. इसके साथ ही सरकार ने शराब की बोतलों पर ‘शराब सेहत के लिए हानिकारक है’ लिखवाने का भी आदेश जारी किया था. Also Read - हाथरस: गैंग रेप की शिकार दलित लड़की की मौत, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की ‘खामोशी’ पर सवाल उठाया; विपक्ष हुआ हमलावर

कांग्रेस सरकार को अपने वादे पूरे करने के लिए बड़ी मात्रा में धनराशि की जरूरत पड़ेगी. बताया जा रहा है कि सरकारी खजाना खाली है. कैबिनेट ने शनिवार को ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत दी जाने वाली राशि को 28,000 रुपये से बढ़ाकर 51,000 रुपये करने को मंजूरी दी थी.

वही देश कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना’ के तहत किसानों का दो लाख रुपये तक का ऋण माफ करने के प्रस्ताव को शनिवार को मंजूरी दी. योजना में अब 12 दिसम्बर 2018 तक ऋण लेने वाले करीब 55 लाख किसान लाभान्वित होंगे. पहले 31 मार्च 2018 तक के ऋणी कृषकों को इसमें शामिल किया गया था, जिसका भाजपा एवं किसानों ने विरोध किया था.