ग्वालियर (मध्यप्रदेश): फिल्म ‘पद्मावत’ के विरोध के बाद से सुर्खियों में आई राजपूत करणी सेना के संस्थापक ठाकुर लोकेन्द्र सिंह कालवी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी संस्था कोई राजनीतिक दल नहीं है और न ही संस्था आने वाले लोकसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी.

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कालवी ने ग्वालियर प्रवास के दौरान पत्रकारों को बताया कि करणी सेना के छह पदाधिकारियों को अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव में टिकट देने की चर्चा थी, लेकिन हम साफ कर देना चाहते हैं कि करणी सेना कोई राजनीतिक दल नहीं है और न ही इसके पदाधिकारी चुनाव में प्रत्याशी होंगे. उन्होंने कहा कि अगर उनका कोई पदाधिकारी किसी दल से चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे करणी सेना से त्यागपत्र देना होगा. कालवी ने बताया कि देश के 22 राज्यों में राजपूतों की संख्या करीब 60 लाख है, जो चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

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उन्होंने कहा कि ‘पद्मावत’ फिल्म में गलत चित्रण का करणी सेना ने विरोध किया था. इस घटना के बाद कोई भी फिल्म निर्माता राजपूतों का गलत चित्रण पेश करने की हिम्मत नहीं करेगा. कालवी ने बताया कि करणी सेना का एक विशाल सम्मेलन 31 मार्च को भोपाल में होने जा रहा है, जिसमें आरक्षण सहित कई अन्य विषयों पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि देश में आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए. हाल में सामान्य वर्ग के लिए लागू हुए 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मध्यप्रदेश के लोगों को नहीं मिल पा रहा है. कालवी ने अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर कहा कि राजपूत भगवान राम के वंशज हैं. राम मंदिर का निर्माण कोई भी करे, लेकिन इस पर स्पष्ट नीति होना चाहिए.

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